नहीं आसाँ तो मुश्किल ही सही मुझको मोहब्बत है’ तुम से ही नाज़ है तुम्हें’ थोड़ा ग़ुरूर मुझे मैंने दिल लगाया है’ तुम से ही आज न पिघला तो कल पिघलेगा यह बात हम सुनेंगे’ तुम से ही आज… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 7 months ago: नहीं आसाँ तो मुश्किल ही सही मुझको मोहब्बत है’ तुम से ही नाज़ है तुम्हें’ थोड़ा ग़ुरूर मुझ … more →
विनय wrote 7 months ago: आँखों की ख़ुशबू को छुआ नहीं महसूस किया जाता है दिल को बहलावा नहीं दर्द दिया जाता है दर्द जो है इश्क़ … more →