धर्म के लिए अब नहीं होता सत्संग हर कोई लड़ रहा है, उसके नाम पर जंग. किताबों के शब्द का सच अब तलवार से बयान किया जाता तय किये जाते हैं अब धार्मिक रंग. एक ढूँढता दूसरे के किताब के दोष ताकि बढ़ा सके वह ज़… more →
****दीपकबापू कहिन**** ****Deepak Bharatdeep's hindi patrika****दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: धर्म के लिए अब नहीं होता सत्संग हर कोई लड़ रहा है, उसके नाम पर जंग. किताबों के शब्द का सच अब तलवार स … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज एक फोरम पर घूमते घामते अपने मित्र समीरलाल ‘उड़न तश्तरी” के ब्लाग पर पहुंच गया। उनका ब्लाग म … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: विश्व में बहुत सारे अपराध होते हैं जिनमे हत्या, बलात्कार, डकैती तथा तस्करी आदि। यह संभव तो हो ही नही … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बदलते मौसम के साथ मन भी यूं बदल जाता है जैसे उसके साथ बंधे हों हाथ ग्रीष्म के जलती दोपहर में व्यग्रत … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: जंगल के राजा शेर को उसके खुफिया प्रमुख सियार भाया ने दी खबर ‘महाराज आपके खिलाफ पूरे … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: पुरानी धरोहर के विभाग में मची थी खलबली क्योंकि सर्वेसर्वा ने आजादी के दिन ऐक कार्यक्रम में कहा था ईम … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: उस आदमी ने मशहूर लेखक पर अनेक पत्थर फैंके हर बार यही कहता कि ‘यह तेरे उन शब्दों का बदला है ज … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: थका हारा आदमी काम से जब घर वापस लौटा तो सास-बहू में कोहराम मचा हुआ था बाप बाहर सिर पकड़े बैठा था तो … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: शहर में गंदगी के ढेर देखकर अंग्रेज पर्यटक ने स्थानीय गाइड से पूछा -’ हमने सुना है जब हमारी … more →