बेबाक हुस्न देखा तेरी क़ज़-अदाएं देखीं एक पल में ही जहाँ की सारी बलाएं देखीं कभी आसमां में इतने बादल नहीं थे देखे ज़ुल्फ़ों में तेरी हमने जितनी घटाएं देखीं उनकी वफ़ाओं का बस मुक़ाबिला नहीं है यूँ तो जहाँ मे… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: बेबाक हुस्न देखा तेरी क़ज़-अदाएं देखीं एक पल में ही जहाँ की सारी बलाएं देखीं कभी आसमां में इतने बादल न … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: जब से मैने वो हँसी सा पैकर देखा है झूमता गाता हुआ हर मंज़र देख है राह में मिलनेवालों से लेते हैं अपनी … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: तुमने मुड़कर भी नहीं देखा मुझे जाते जाते एक तकल्लुफ़ ही सही जिसको निभाते जाते क्या ख़ता थी के टूट गये ह … more →