कुछ गिरा है, मै यहां पर क्या गिरा है देख लूँ है लहू किसका ये उसका या मिरा है देख लूँ मै नहीं जाता था बुतखाने मगर आया हूँ अब सुन रहा हूँ के यहां चेहरा तिरा है, देख लूँ मै चला था जिस जगह से फिर वहीं पर … more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: कुछ गिरा है, मै यहां पर क्या गिरा है देख लूँ है लहू किसका ये उसका या मिरा है देख लूँ मै नहीं जाता था … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: उसकी गली में देख तो मुझे आज मेरा पता मिला दैरोहरम भटका किया, दिलेबेख़बर में खुदा मिला जिस मोड़ से मै ब … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: कैसा सजा है आज ये बाज़ार देख तो इन्सान ही इन्सां का खरीदार देख तो कैसा लगा है आज ये दरबार देख तो मुंस … more →