वह दिल में एक मस्जिद है जिसमें रोज़ नमाज़ अदा करता हूँ वह मन मन्दिर की देवी है जिसकी साँझ-सवेरे पूजा करता हूँ मैं ख़तावार हूँ गुनाहे-इश्क़ का उसके दर पे रोज़ सजदे करता हूँ वह संगदिल है नरम दिल भी अपनी जान… more →
तख़लीक़-ए-नज़रप्रेमलता पांडे wrote 9 months ago: जय जननी, जय शक्तिदायिनी, नवदुर्गा माँ! १ जय अपर्णा! हिमालय तनया, शैलपुत्री माँ! २ जय भवानी, जय ब् … more →
aspundir wrote 1 year ago: देवी कवच विनियोग – ॐ अस्य श्रीदेव्या: कवचस्य ब्रह्मा ऋषि:, अनुष्टुप् छन्द:, ख्फ्रें चामुण्डाख् … more →
विनय wrote 1 year ago: वह दिल में एक मस्जिद है जिसमें रोज़ नमाज़ अदा करता हूँ वह मन मन्दिर की देवी है जिसकी साँझ-सवेरे पूजा क … more →