हिंदी -अंग्रेजी अनुवाद टूल का मैं कल से उपयोग कर रहा देख रहा हूं तो उसमें सुखद आश्चर्य का अनुभव हो रहा है। प्रथम तो यह कि यदि शुद्ध हिंदी भाषा को लिखेंगे तो ही वह स्वीकार करेगा। कहीं पाठ को लिखने के द… more →
****दीपकबापू कहिन**** ****Deepak Bharatdeep's hindi patrika****दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हिंदी -अंग्रेजी अनुवाद टूल का मैं कल से उपयोग कर रहा देख रहा हूं तो उसमें सुखद आश्चर्य का अनुभव हो र … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कल एक टीवी चैनल पर प्रसारित खबर एक खबर के अनुसार सऊदी अरब में वेलेंटाइन डे पर उसे मनाने से रोकने के … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आखिर आतंकवादियों ने बेनजीर को मौत की नींद सुला दिया। एक मासूम औरत जो अपने देश के लोगों के लिए लोकतंत … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: रक्षा बंधन के अवसर पर उसकी सब प्रेयसियो ने मिलने में असमर्थता जताई प्रियतम को तो कोई बहिन नहीं … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: चारों तरफ विकास का इस तरह शोर मचा हुआ है की यह पता ही नहीं लग रहा कि उसका वास्तविक रूप क्या है? क् … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: शहर में गंदगी के ढेर देखकर अंग्रेज पर्यटक ने स्थानीय गाइड से पूछा -’ हमने सुना है जब हमारी … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: वाह रे बाज़ार तेरा खेल मैदान में पिटे हीरो को कागज और फिल्म पर चमकाकर और सजाकर जनता के बीच देता है ठ … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: आँखें देखतीं हैं कान सुनते हैं और जीभ का काम है बोलना पर जो पहचान करे सुनकर जो गुने और जो श्रीमुख से … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: बच गया हेरी पॉटर लोग जश्न मनाते हुए किताब खरीदने के लिए दुकानों पर लाईन में खडे हैं अपनी हकीकतों से … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: यह कविता काल्पनिक है तथा किसी घटना या व्यक्ति से इसका कोई संबंध नहीं है। कल सांय प्रकाशित रचना कुछ न … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: आकर्षक मुख पृष्ठ के अन्दर शब्द सोंदर्य से सुसज्जित व्याकरण का बेहतर उपयोग कर लिखी गयी वह रचना अगर वह … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: (यह व्यंग्य कविता काल्पनिक है तथा किसी व्यक्ति या घटना से कोई संबंध नहीं है- गलत टाईम सेटिं … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: तुम उन महलों में चकाचौंध से भरी रोशनी को मत देखो अच्छा होगा तो उनसे मुहँ फेरकर अपने घर के अँधेरे के … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: अपने मुहँ से बढ़ाएं, अपनी बात का भाव दुसरे को दें नसीहत, अपने मन में दुर्भाव न वाणी में मिठास, न विच … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: मुझे कोई गुरू नहीं मिला, इसीलिये आध्यात्म विषयों पर बडे संकोच के साथ लिखता और विचार व्यक्त करता हूँ। … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: कहा जाता है बोए पेड बबूल के तो आम कहॉ से होय। यह कहावत अपने आप में बहुत बड़ा दर्श … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: यह प्रश्न नहीं है कि किसी जात के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण की माँग जायज है कि न … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: कोई भी धर्म अपने अनुयायियों के विश्वास के बिना नहीं चल सकता , और उसके मुखिया अपना … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: लोग सोचते हैं कि पर्यावरण हमारी जिम्मेदारी नहीं है । वनों को काटना पशुओं को मiरना हमारा अधिकार है और … more →