पन्नों में जल रहे थे कुछ साल ज़िन्दगी के , धुआँ धुआँ से हो गये कई ख्याल ज़िन्दगी के । एक तेरी याद है बस जो दिल बेहलाती है , वरना सताते हैं हमे कई सवाल ज़िन्दगी के । वफ़ा मोहब्बत में ,दोस्ती में बेवफ़ाई , ह… more →
लम्हें जिन्दगी केविनय wrote 3 months ago: सहर-ब-सहर1 मैं ढूँढ़ता रहा शुआएँ2 कहाँ छिप गयीं नूर-सी रोशन निगाहें न कोई घर रहा मेरा न कोई ठिकाना म … more →
विनय wrote 6 months ago: जो लोग अच्छे होते हैं दिखते नहीं हैं चाहने वाले बाज़ार में बिकते नहीं हैं ख़ुद से पराया ग़ैरों से अपन … more →
विनय wrote 9 months ago: हम सब के सच्चे दोस्त हैं हर दिल की बात समझते हैं उसकी ख़ुशी को हम अपने ख़ुशी के आँसुओं में रखते हैं … more →
विनय wrote 1 year ago: एक दोस्त मेरा भी हो एक यार मेरा भी हो जिसकी बाँहों में मुझे मिल जाये ज़िन्दगी जो झूठ-मूठ रूठ के सताये … more →
विनय wrote 1 year ago: सिफ़र को टोह लेते हैं दिले-यार में अपनी भी दीवानगी कुछ कम नहीं मैं और वह, दोनों कभी दोस्त थे! सिफ़र= श … more →
विनय wrote 1 year ago: शबनमी सर्द रात है और ख़्याल तेरा चाँद तन्हा मैं तन्हा और ख़्याल तेरा सबसे छुपाया पर छुपा न राज़े-मोहब … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 1 year ago: मेरे आशियाने में , तेरी कसम तेरी ही कमी थी । थे चांद तारे , खुदा और तेरी तस्वीरें लगी थी । बहुत कम … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 1 year ago: कुछ रंगो को तुलिका की ज़रूरत नहीं होती हर बात को कहने के लिए जुबां की ज़रूरत नहीं होती हम वो राही … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 1 year ago: हंसी खुशी ,रिश्ते नाते ,एहसास दोस्ती से मिल कर बनी कविता हूँ मैं , जो अपनी होकर भी , बुरी लगे , एक ऎ … more →
विनय wrote 1 year ago: तुमको लौट के यहीं आना है (यहीं आना है) तुम मानो या न मानो मेरा दिल तेरा आशियाना है (आशियाना है) तुम … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 1 year ago: एक गीत बेख़बर जिंदगी से जी रहे थे के तुम आ गये | कहुँ कैसे मरे जा रहे थे के तुम आ गये | हे मजिंल … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 1 year ago: आती है पश्चिम से ये तूफ़ानी हवाएँ , घनघोर अंधेरा , छत पर आकर बादल लाएँ , मेरे कमरे को रोशन करता , द … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 1 year ago: जो गम देके तुमने सिखाया हमें । जिन्दगी में बहुत काम आया हमें । जब लगी ठोकर , गिर के बैठ गये , तब ल … more →
विनय wrote 1 year ago: तो अब दोस्त रह गये बस नाम के हम अज़ीज़ है जब तक हैं काम के मेरे माज़ी से चुरा ले जाता काश कोई सारे टुक … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 1 year ago: एक नज़्म भीड़ में भी जब कोई तुम्हें तन्हा दिखाई दे , सबके साथ होकर भी जब कोई अकेला दिखाई दे | हँसते … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 1 year ago: सफ़र के बाद अफ़साने ज़रूरी हैं | ना भूल पाए वो दीवाने ज़रूरी हैं | जिन आँखों में हँसी का धोखा हो … more →
विनय wrote 1 year ago: और कैसे रक़ीब के यार हमसे पेश आते वह हमसे अय्यारी नहीं तो और क्या फ़रमाते हमारी क़िस्मत में जीते-जी फ़ना … more →
Grey Rainbow - स्याह इंद्रधनुष wrote 1 year ago: यार तुम्हारे साथ, जीवन है आनन्द भरा, धरती और अम्बर में फैला, रंग जैसे हरा । कोई छोटा-बड़ा नहीं, न कु … more →
विनय wrote 1 year ago: नहीं कोई दोस्त मेरा न सही रक़ीबों से मिल के दिल हल्का करते हैं सैलाबे-क़लक़ चढ़ता जाता है पैमाने दर्द क … more →