बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जोरे बड़ मति नांहि जैसे फूल उजाड़ को, मिथ्या हो झड़ जांह… more →
दीपक भारतदीप की शब्दलेख-पत्रिकादीपक भारतदीप wrote 1 month ago: बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जोरे बड़ मति नांह … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: मीन कटि जल धोइये, खाए अधिक पियास रहिमन … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: ‘कबीर’ मन फूल्या फिरै,करता हूँ मैं … more →