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Blogs about: दोहे

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ये कैसी मंदी सजन - शिवराम के दोहे10 comments

रवि कुमार, रावतभाटा wrote 6 days ago: ये कैसी मंदी सजन – शिवराम के दोहे ( a kavita poster by ravi kumar, rawatbhata) पिछली बार शिवरा … more →

Tags: कविता-पोस्टर, मंदी, शिवराम

संत कबीर के दोहे-भक्त नारी से रानी भी बराबरी नहीं कर सकती (kabir ke dohe-bhakt nari se rani)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: दुखिया भूखा दुख कीं, सुखिया सुख कौं झूरि सदा अजंदी राम के, जिनि सुख-दुख गेल्हे दूरि संत शिरोमणि कबीर … more →

Tags: Hindi knowledge, Hindi writing, Hindi Darshan, Hindu darshan, Hindu culture, India, hindu dharm, web duniya, hindi abhivyakti

कबीर वाणी-प्यार को सही ढंग से कोई नहीं समझता(kabir vani-pyar ka gyan)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: प्रेम-प्रेम सब कोइ कहैं, प्रेम न चीन्है कोय जा मारग साहिब मिलै, प्रेम कहावै सोय संत शिरोमणि कबीरदास … more →

Tags: Anubhuti, arebic, अनुभूति, अभिव्यक्ति, चिंतन, दीपक भारतदीप, धर्म, सन्देश, हिन्दी

संत कबीर के-रात के सपने निराशा का भाव पैदा करते हैं (sant kabir-rat ke sapne aur nirasha)

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: कबीर सपनें रैन के, ऊपरी आये नैन जीव परा बहू लूट में, जागूं लेन न देन संत शिरोमणि कबीरदास जी का आशय य … more →

Tags: abhivyakti, adhyatm, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्त राम, शब्द

रहीम क दोहे- दिल लगाकर कम करें कामयाबी तय करें (rahim ke dohe)1 comment

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: रहिमन मनहि लगाईं कै, देखि लेहू किन कोय नर को बस करिबो कहा, नारायन बस होय कविवर रहीम के मतानुसार मन ल … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, धर्म, मस्त राम, सन्देश, साहित्य, हिन्दी, Deepak bharatdeep

रहीम दास के दोहे: पशु अपना हित करने वाला गुड़ कभी नहीं खाते

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: कविवर रहीम कहते हैं रहिमन आलस भजन में, विषय सुखहिं लपटाय घास चरै पसु स्वाद तै, गुरु गुलिलाएं खाय मनु … more →

Tags: हिन्दी, आलेख, अभिव्यक्ति, jagran, Internet, rahim, bharat, सन्देश, साहित्य

रहीम के दोहे: ख़ुशी के बदले ख़ुशी जरूर प्रदान करें

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: नाद रीझि तन देत मृग, नर धन हेत समेत ते रहीम पशु से अधिक, रीझेहु कछू न देत कविवर रहीम कहते हैं कि बां … more →

Tags: हिंदी, hindi article, हिंदी साहित्य, धर्म, adhyatm, dharm, hindu, rahim ke dohe, RAM

रहीम संदेश: मुसीबत में भी दिल दिमाग पर काबू रखना चाहिए

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: सरवर के खग एक से, बाढ़त प्रीति न धीम पै मराल को मानसर, एकै ठौर रहीम अधिकतर पक्षी एक समान होते हैं। उ … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आध्यात्म, आलेख, हिंदी पत्रिका, Deepak bharatdeep, Family, hindi bhasha, Hindi Darshan

संत कबीर वाणीः किताबें अधिक पढ़ने से तो योग करना ही ठीक

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कबीर पढ़ना दूर कर, अति पढ़ना संसार पीर न उपजै, जीव की, क्यौं पावै करतार संत कबीर जी कहते हैं कि अधिक … more →

Tags: समाज, हिंदी पत्रिका, Deepak bharatdeep, hindi megzine, Hindi writing, web bhasakar, web dunia, web duniya, web jagaran

संत कबीर संदेशः उपदेश देने से क्या लाभ जब सुनने वाले का दिमाग घर में न हो 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: संत शिरोमणि कबीरदास जी के अनुसार ————————— … more →

Tags: हिंदी, हिंदी पत्रिका, Deepak bharatdeep, Hindi writing, web bhasakar, web dunia, web duniya, web jagaran, web nai duniya

रहीम संदेशःहंस के समान मानसिक रूप से दृढ़ होना चाहिए

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: सरवर के खग एक से, बाढ़त प्रीति न धीम पै मराल को मानसर, एकै ठौर रहीम अधिकतर पक्षी एक समान होते हैं। उ … more →

Tags: Hindi Education, Hindi knowledge, Hindi writing, India, hindi bharat, web duniya, Hindi book, hindi adhyatm, hindi thinking

संत कबीर वाणीः किसी काम के नहीं हों तो ऊंचे आदमी होने से क्या लाभ1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जोरे बड़ मति नांहि जैसे फूल उजाड़ को, मिथ्या हो झड़ जांहि संत शिरोमणि कबीरदास … more →

Tags: समाज, हिंदी पत्रिका, Deepak bharatdeep, hindi megzine, Hindi writing, web bhasakar, web dunia, web duniya, web jagaran

कहने वाले का कहना ही है व्यापार-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: एक सपना लेकर सभी लोग आते हैं सामने दूर कहीं दिखाते हैं सोने-चांदी से बना सिंहासन कहते हैं ‘तुम उस पर … more →

Tags: चिंतन, अभिव्यक्ति, alekh, abhivyakti, editoriyal, Internet, Friends, bharat, India

रहीम के दोहे:देता तो परमात्मा है किसी अन्य का भ्रम मत पालो1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: देनदार कोउ और है, भेजत सा दिन रैन लोग भरम पै धरे, वाते नीचे नैन कविवर रहीम कहते हैं कि इस जीवन में क … more →

Tags: आलेख, अध्यात्म, jagran, editoriyal, Internet, rahim, Friends, dharm, dohe

रहीम के दोहे:अपने मन की वेदना सबके सामने मत प्रगट करो

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: रहिमन आंसुवा नैन ढरि, जिस दुख प्रगट करेइ जाहिं निकारो गेह तें, कस न भेद कहिं देइ कविवर रहीम कहते हैं … more →

Tags: हिन्दी, आलेख, संपादकीय, अभिव्यक्ति, jagran, alekh, abhivyakti, adhyatm, editoriyal

संत कबीर वाणी:टोना-टोटका सब झूठ है1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जंत्र मंत्र झूठ है, मति भरमो जग कोय सार शब्द जानै बिना, कागा हंस न होय संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते ह … more →

Tags: अध्यात्म, alekh, adhyatm, editoriyal, Internet, Kabir, dharm, dohe, hindu

संत कबीर वाणी:प्रपंची गुरूओं से कोई लाभ नहीं

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: शब्द कहै सौ कीजिये, बहुतक गुरु लबार अपने अपने लाभ को, ठौर ठौर बटपार संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं … more →

Tags: आलेख, चिंतन, अध्यात्म, jagran, alekh, abhivyakti, adhyatm, Internet, Kabir

कबीर संदेशःअहंकार होता है पतन का कारण

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मैं मेरी तू जनि  करै, मेरी मूल विनासि मेरी पग का पैखड़ा, मेरी गल की फांसि संत शिरोमणि कबीरदास जी कहत … more →

Tags: adhyatm, दीपक भारतदीप, धर्म, मस्तराम, साहित्य, हिन्दी, Deepak bharatdeep, dharm, dohe

रहीम के दोहे:मांगने से सम्मान कम होता है

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जानि अनीती जे करैं, जागत ही रह सोई। ताहि सिखाई जगाईबो, उचित न होई ॥ अर्थ-समझ-बूझकर भी जो व्यक्ति अन् … more →

Tags: हिन्दी, आलेख, चिंतन, अध्यात्म, hindi, jagran, alekh, abhivyakti, adhyatm


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