डरपोक लोगों के समाज में बहादुर बाहर से किराये पर लाये जाते हैं. किसी गरीब को न देना पड़े मुआवजा इसलिए किसी की कुर्बानी कहाँ दी गयी इससे न होता उनका वास्ता उधार के शहीदों के गीत चौराहे पर गाये जाते हैं.… more →
***दीपक भारतदीप की हिंदी पत्रिका*** ***Deepak Bharatdeep ki Hindi patrika***दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: डरपोक लोगों के समाज में बहादुर बाहर से किराये पर लाये जाते हैं. किसी गरीब को न देना पड़े मुआवजा इसलिए … more →
विनय wrote 2 years ago: इक मौक़ा दो तुम मुझे कि बता सकूँ कितना टूटकर प्यार करता हूँ तुमसे तुम्हें जो चाहिए सब दूँगा मैं प्यार … more →
विनय wrote 2 years ago: नामालूम वह दिन मैंने जन्नत में गुज़ारे या जहन्नुम में मगर बीते हुए दिन मुझे आज भी ढ़ूँढते हैं वह ताने … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: बड़े आदमी बनने के लिये सभी इंसान जूझ रहे हैं सदियां बीत गयी हैं पर कौन छोटा है या बड़ा सभी इस पहली स … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: चांदी के बर्तन में खीर खाने के लिये सोने का चम्मच हाथ में जब मिल जाता है तब चमचा बनने में क्या हर्ज … more →