रो पड़ा सुन कर कहानी गहन यह संवेदना दिल नहीं पत्थर हो वे ना समझ सकते वेदना भेद खुलवाने को शठ का निहत्थे पर वार हो यन्त्रणा देता कसाई भोंक रहा कटार हो पिघलता लोहा जब दिल में मशीनी हथियार हो बरसता बन दर्… more →
हरिहर झाHarihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: रो पड़ा सुन कर कहानी गहन यह संवेदना दिल नहीं पत्थर हो वे ना समझ सकते वेदना भेद खुलवाने को शठ का निहत् … more →