धूप का रेशमी टुकड़ा दिन की पहली प्रहर में कोई दस्तक सुनाई दी झरोखे से देखा छुपकर वो खड़ा था मेरी दहलीज़ पर सोने सी चमकती काया मुखड़े पर अरुनिम तेज धूप का रेशमी टुकड़ा सरक सरक के आगे बढ़ रहा था जैसे अ… more →
mehekmehhekk wrote 1 year ago: धूप का रेशमी टुकड़ा दिन की पहली प्रहर में कोई दस्तक सुनाई दी झरोखे से देखा छुपकर वो खड़ा था मेरी दह … more →