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Blogs about: धूप

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जो मुझे होता है वह दर्द तुझ तक पहुँचे14 comments

विनय wrote 10 months ago: जो मुझे होता है वह दर्द तुझ तक पहुँचे यूँ इस ख़ला की यह गर्द तुझ तक पहुँचे की है इस दिल ने सदा तुझसे … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, आलम, इश्क़, ख़ला, गर्द, चमन, दर्द, दिल, प्यार

होठों पर कोई प्यास रखो...5 comments

pryas wrote 1 year ago: तुम भूल जाओ या याद रखो, कोई आयेगा इसकी आस रखो. धूप में पिघल जायेंगे सपने, जुल्फों की छाँव पास रखो. ह … more →

Tags: मेरी रचना, pryas, Naresh, हौंसलें, आसमां, सपने, प्यास, Dhoop, aaskma

उम्मीद है हम तुम मिलेंगे3 comments

विनय wrote 1 year ago: उम्मीद है हम तुम मिलेंगे उम्मीद है नये दीप जलेंगे जब बसंत की धूप महकेगी उम्मीद है दोनों दिल खिलेंगे … more →

Tags: मेरा गीत, इश्क़, उम्मीद, कली, ख़त, ख़ुशबू, घर, दिल, दीप

नित उड़ता हूँ तेरी कजरारी अँखियों में2 comments

विनय wrote 1 year ago: नित उड़ता हूँ तेरी कजरारी अँखियों में मैं रंग-बिरंगे सपनों की छतरी लेके साँवले का मन लुभाके, बिजली ग … more →

Tags: मेरा गीत, Heart, Mind, बदन, dido, Body, मन, जिया, desert

ख़िज़ाँ मुस्कुराने लगी

विनय wrote 1 year ago: ख़िज़ाँ मुस्कुराने लगी सूखे पत्ते उड़ाने लगी दरख़्त की शाख़ों पर धूप की बूँदें नहीं सूरज का दरिया है … more →

Tags: मेरा गीत, Earth, Tree, ज़िन्दगी, बूँद, चाँद, इश्क़, Love, प्यार

उफ़! यह छाँव की उमस

विनय wrote 1 year ago: उफ़! यह छाँव की उमस तौबा यह झूठे फ़साने उम्मीद की धूप रिस गयी है शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’ लेखन वर्ष: … more →

Tags: मेरी त्रिवेणी, ज़िन्दगी, उम्मीद, उफ़, इश्क़, Love, प्यार, मोहब्बत, तौबा

कितना काला पड़ गया हूँ2 comments

विनय wrote 1 year ago: मैं तेरे इश्क़ की छाँव में जल-जलकर कितना काला पड़ गया हूँ, आकर देख तू मुझे हुस्न की धूप का एक टुकड़ा … more →

Tags: मेरी त्रिवेणी, हुस्न, इश्क़, Love, प्यार, मोहब्बत, Shadow, Beauty, dark

यह शाम की धूप

विनय wrote 1 year ago: कोई हमसायादार पेड़ नहीं मिला ज़हर मिले तो ज़हर भी खा लूँ यह शाम की धूप बहुत कड़ी है… शायिर: विनय … more →

Tags: मेरी त्रिवेणी, ज़िन्दगी, इश्क़, Love, प्यार, मोहब्बत, शाम, Life, Evening

जानते हैं दर्द बुझते हुए चाँद का

विनय wrote 1 year ago: जानते हैं दर्द बुझते हुए चाँद का जब बढ़ते आते हैं सुबह के क़दम जुस्त-जू की छाया खो जाती है कहीं चाँद … more →

Tags: मेरा गीत, चाँद, दर्द, Heart, Love, पलाश, गुल, दिल, ख़ुशबू

खिले इस तरह तेरे रंग और रूप

विनय wrote 1 year ago: खिले इस तरह तेरे रंग और रूप जैसे सर्दियों की भीनी-भीनी धूप अब यह आलम है दिलो-ज़हन का करता हूँ हर शै म … more →

Tags: रुबाइयाँ, रंग, भीनी, आलम, ज़हन, महसूस, इश्क़, Love, Mind

तेरे चेहरे पर अपनी नज़र ढूँढ़ते हैं

विनय wrote 2 years ago: हर गली हर कूचा दर-ब-दर ढूँढ़ते हैं हम अपनी दुआ में असर ढूँढ़ते हैं तुम देखकर हँसते हो मुझे और हम तेर … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, असर, इश्क़, कोहरा, गली, चाहत, दुआ, नगर, नज़र

तो शायद साँस पड़ जाये इनमें...

विनय wrote 2 years ago: एक पानी में भीगी हुई किताब जाने किसने? सूखने के लिए रख दी है धूप में जैसे जैसे नमी भाप बनती है पन्ने … more →

Tags: मेरी नज़्म, ज़िन्दगी, eyes, साँस, नीली, आँखें, Life, पन्ने, Pages


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