Blogs about: धूप

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तुम्हारी ख़ुशबू से महक उठा है मन2 comments

विनय प्रजापति wrote 1 month ago: तुम्हारी ख़ुशबू से महक उठा है मन तुम्ह … more »

Tags: मेरा गीत

उम्मीद है हम तुम मिलेंगे3 comments

विनय प्रजापति wrote 1 month ago: उम्मीद है हम तुम मिलेंगे उम्मीद है नये … more »

Tags: मेरा गीत

कोई तो तुम्हें पाने की राह मिले1 comment

विनय प्रजापति wrote 1 month ago: कोई तो तुम्हें पाने की राह मिले कभी ते … more »

Tags: मेरा गीत

नग़मे खिलने लगे हैं

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: नग़मे खिलने लगे हैं नज़्म महकने लगी है … more »

Tags: मेरा गीत

नित उड़ता हूँ तेरी कजरारी अँखियों में2 comments

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: नित उड़ता हूँ तेरी कजरारी अँखियों में … more »

Tags: मेरा गीत

ख़िज़ाँ मुस्कुराने लगी

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: ख़िज़ाँ मुस्कुराने लगी सूखे पत्ते उड़ … more »

Tags: मेरा गीत

उफ़! यह छाँव की उमस

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: उफ़! यह छाँव की उमस तौबा यह झूठे फ़साने उम … more »

Tags: मेरी त्रिवेणी

कितना काला पड़ गया हूँ2 comments

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: मैं तेरे इश्क़ की छाँव में जल-जलकर कितन … more »

Tags: मेरी त्रिवेणी

यह शाम की धूप

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: कोई हमसायादार पेड़ नहीं मिला ज़हर मिले … more »

Tags: मेरी त्रिवेणी

टूटे हुए चाँद को2 comments

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: टूटे हुए चाँद को सादे काग़ज़ में लपेटा … more »

Tags: मेरा गीत

जानते हैं दर्द बुझते हुए चाँद का

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: जानते हैं दर्द बुझते हुए चाँद का जब बढ … more »

Tags: मेरा गीत

दीप जलाओ रात को पूनम कर दो

विनय प्रजापति wrote 4 months ago: दीप जलाओ रात को पूनम कर दो मेहबूब की या … more »

Tags: मेरी ग़ज़ल

खिले इस तरह तेरे रंग और रूप

विनय प्रजापति wrote 5 months ago: खिले इस तरह तेरे रंग और रूप जैसे सर्दि … more »

Tags: फुटकर कलाम

अब तेरा ही सपना है

विनय प्रजापति wrote 5 months ago: रात-दिन दुआओं में तुमको माँगता हूँ तुम … more »

Tags: मेरी ग़ज़ल

तेरे चेहरे पर अपनी नज़र ढूँढ़ते हैं

विनय प्रजापति wrote 7 months ago: हर गली हर कूचा दर-ब-दर ढूँढ़ते हैं हम अप … more »

Tags: मेरी ग़ज़ल

ज़ुलेख़ा

विनय प्रजापति wrote 8 months ago: तुम्हें कई बार देखा है मैंने सिंदूरी श … more »

Tags: मेरी नज़्म

बड़ी उदास दोपहर है

विनय प्रजापति wrote 8 months ago: बड़ी उदास दोपहर है, दिल भी ख़ाली मेरा क … more »

Tags: मेरी नज़्म

बारिश जैसी हो तुम

विनय प्रजापति wrote 8 months ago: खिली हुई शाम की बिखरी हुई धूप में बारि … more »

Tags: मेरी नज़्म

बेक़रार है उदास है बिन तुम्हारे...

विनय प्रजापति wrote 8 months ago: मेरी ज़िन्दगी में धूप थी मगर तेरी यादों … more »

Tags: मेरी नज़्म


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