Blogs about: धूप
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तुम्हारी ख़ुशबू से महक उठा है मन
तुम्हारी ख़ुशबू से महक उठा है मन तुम्हारे तस्व्वुर से भर आये नयन बरखा की मखम… more »
तख़लीक़-ए-नज़र
तुम्हारी ख़ुशबू से महक उठा है मन
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: तुम्हारी ख़ुशबू से महक उठा है मन तुम्ह … more »
उम्मीद है हम तुम मिलेंगे
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: उम्मीद है हम तुम मिलेंगे उम्मीद है नये … more »
कोई तो तुम्हें पाने की राह मिले
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: कोई तो तुम्हें पाने की राह मिले कभी ते … more »
नग़मे खिलने लगे हैं
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: नग़मे खिलने लगे हैं नज़्म महकने लगी है … more »
नित उड़ता हूँ तेरी कजरारी अँखियों में
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: नित उड़ता हूँ तेरी कजरारी अँखियों में … more »
ख़िज़ाँ मुस्कुराने लगी
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: ख़िज़ाँ मुस्कुराने लगी सूखे पत्ते उड़ … more »
उफ़! यह छाँव की उमस
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: उफ़! यह छाँव की उमस तौबा यह झूठे फ़साने उम … more »
कितना काला पड़ गया हूँ
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: मैं तेरे इश्क़ की छाँव में जल-जलकर कितन … more »
यह शाम की धूप
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: कोई हमसायादार पेड़ नहीं मिला ज़हर मिले … more »
टूटे हुए चाँद को
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: टूटे हुए चाँद को सादे काग़ज़ में लपेटा … more »
जानते हैं दर्द बुझते हुए चाँद का
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: जानते हैं दर्द बुझते हुए चाँद का जब बढ … more »
दीप जलाओ रात को पूनम कर दो
विनय प्रजापति wrote 4 months ago: दीप जलाओ रात को पूनम कर दो मेहबूब की या … more »
खिले इस तरह तेरे रंग और रूप
विनय प्रजापति wrote 5 months ago: खिले इस तरह तेरे रंग और रूप जैसे सर्दि … more »
अब तेरा ही सपना है
विनय प्रजापति wrote 5 months ago: रात-दिन दुआओं में तुमको माँगता हूँ तुम … more »
तेरे चेहरे पर अपनी नज़र ढूँढ़ते हैं
विनय प्रजापति wrote 7 months ago: हर गली हर कूचा दर-ब-दर ढूँढ़ते हैं हम अप … more »
ज़ुलेख़ा
विनय प्रजापति wrote 8 months ago: तुम्हें कई बार देखा है मैंने सिंदूरी श … more »
बड़ी उदास दोपहर है
विनय प्रजापति wrote 8 months ago: बड़ी उदास दोपहर है, दिल भी ख़ाली मेरा क … more »
बारिश जैसी हो तुम
विनय प्रजापति wrote 8 months ago: खिली हुई शाम की बिखरी हुई धूप में बारि … more »
बेक़रार है उदास है बिन तुम्हारे...
विनय प्रजापति wrote 8 months ago: मेरी ज़िन्दगी में धूप थी मगर तेरी यादों … more »
