एक पल सुखी एक पल दुखी, दो घड़ी कुछ इस तरह बीत चली, ज़िंदगी जैसे मुझसे रूठ चली, एक पल अपना एक पल पराया, अपनों ने अपनों से धोखा खाया, ज़िंदगी से अपनों से दूर चला आया, एक पल खोया एक पल पाया, प्यार देके कभी… more →
मेरे दिल ने...दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: अपने शहर पर इतना नहीं इतराओ कि फिर पराये लगने लगें लोग सभी कभी यह गांव जितना छोटा था तब न तुम थे यहा … more →
विनय wrote 1 year ago: हमने तुमको तुमसे चुराया दिल में अपने तुमको बसाया तुम भी दीवाने हो गये हो दूर जो ख़ुद से हो गये हो आओ … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: एक पल सुखी एक पल दुखी, दो घड़ी कुछ इस तरह बीत चली, ज़िंदगी जैसे मुझसे रूठ चली, एक पल अपना एक पल पराया … more →
विनय wrote 1 year ago: दिल ख़ुद ख़ला है उसमें दूसरी ख़ला क्या होगी मैंने सय्यारों की तरह भटककर देखा है इसमें दूर-दूर तक इसम … more →