जो लोग साधना मार्ग पर आते हैं उन्हें सिखाया जाता है कि आप स्वांस को नाभि से लेना और छोड़ना प्रारंभ करें. अब बड़ी मुश्किल यह है कि चिकित्सा विज्ञान कहता है कि फेफड़े से सांस लो और छोड़ो. चिकित्सा विज्ञ… more →
अलखबाड़ाjayantijain wrote 1 week ago: चाय महोत्सवः चाय पीने का आनन्द कैसे उठाए ? जीवन जीने की कला झेन मत में चाय पीने की घटना द्वारा सीखाई … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: प्राचीन भारतीय योग साधना पद्धति की तरफ पूरे विश्व का रुझान बढ़ना कोई अस्वाभाविक घटना नहीं है। आज से द … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: संत शिरोमणि कबीर दास जी कहते हैं ————————– देख … more →
alakh niranjan wrote 2 months ago: जो लोग साधना मार्ग पर आते हैं उन्हें सिखाया जाता है कि आप स्वांस को नाभि से लेना और छोड़ना प्रारंभ क … more →
msujashjain wrote 5 months ago: 2. प्रश्न – ध्यान में गंदे विचार क्यों आते हैं ? अलमारी के बाहर के सामान निकालोगे तो अंदर के सामान द … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: वह जो सभी तरफ दिखाया जा रहा है उसका मुख्य उद्देश्य तुम्हें भीड़ बनाना है। वह भीड़ जो समय पड़े तो उसे जा … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हिन्दी,हिन्दू और हिंदुत्व शब्दों में जो आकर्षण है उसका कारण कोई उनकी कानों को सुनाई देने वाली ध्वनि … more →
aspundir wrote 1 year ago: लक्ष्मी ध्यान (१) सहस्त्रदलपद्मस्य कर्णिकावासिनीं पराम्। शरत्पार्वणकोटीन्दुप्रभाजुष्टवराम्बराम्।। स् … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: इस बात को कई लोग मानने लगे है कि योगासन, प्राणायाम और ध्यान से तन,मन और विचारों के विकास शरीर से निक … more →
Nikhilashish wrote 1 year ago: सौवर्णासनसंस्थितांत्रिनयनां पीतांशुकोल्लासिनीं हेमाभांगरुचिं शशांकमुकुटां सच्चम्पकस्त्रग्युताम् | हस … more →
Nikhilashish wrote 1 year ago: विश्वव्यापकवारिमध्यविलसच्छ्वेताम्बुजन्मस्थितां कर्त्रीँखड्गकपालनीलनलिनै राजत्करां नीलभां | कांचीकुण् … more →
Nikhilashish wrote 1 year ago: उद्यद्दिनेश्वररुचिं निजहस्तपद्मैः पाशांकुशाभयवरान्दधतं गजास्याम् | रक्ताम्बरं सकलदुःखहरं गणेशं ध्याय … more →
Nikhilashish wrote 1 year ago: सद्यश्छिन्नशिरः कृपाणमभयं हस्तैर्वरंबिभ्रतीँ घोरास्यां शिरसांस्त्रजासुरुचिरामुन्मुक्तकेशावलिम || स्र … more →
alakh niranjan wrote 2 years ago: यह एक अद्भुद ध्यान पद्धति है. और इसके जरिए मस्तष्क से हृदय में उतरना आसान होता है. बुद्धिवादी से भाव … more →
alakh niranjan wrote 2 years ago: रीढ़ को सीधा करके बैठ जाईये. आंखे बंद. पूरे शरीर को ढीला छोड़ दीजिए. ध्यान रहे कमर झुकनी नहीं चाहिए. … more →
alakh niranjan wrote 2 years ago: सूत्र-2 घनीभूत इच्छा को दिशा दिजीए क्रिया आत्मा को उपलब्ध होना परम इच्छा है. नाभि से आसक्ति बढ़ाईये. … more →
alakh niranjan wrote 2 years ago: ध्यान की विधियां सैकड़ों हैं लेकिन सबका लक्ष्य एक हैं. ऐसी ही एक ध्यान विधि का उल्लेख मैं यहां कर रह … more →