ओ नंगे ! हां तुम…… तुम नंगे, अरे! फिर भी पढ़े जा रहे हो तुम अभद्र नहीं मानोगे क्या तुम ? तो सुनो तुम मनुष्य निर्वस्त्र ! तुम नग्न हो क्योंकि निर्लज्ज, कह तो दिया, निर्लज्ज हो तुम, मनुष्यों … more →
स्याह इंद्रधनुष और चाँदनी रातेंGrey Rainbow - स्याह इंद्रधनुष wrote 3 months ago: ओ नंगे ! हां तुम…… तुम नंगे, अरे! फिर भी पढ़े जा रहे हो तुम अभद्र नहीं मानोगे क्या तुम ? … more →