आंगन नन्द के दधिकादो। छिरकत गोपी ग्वाल परस्पर प्रगटे जग में जादो॥१॥ दूध लियो दधि लियो लियो घृत माखन माट संयूत। घरघरते सब गावत आवत भयो महर के पूत॥२॥ वाजत तूर करत कोलाहल वारि वारि दे दान। जियो जसोदा पूत… more →
पुष्टिमार्गpushtimarg wrote 1 year ago: आंगन नन्द के दधिकादो। छिरकत गोपी ग्वाल परस्पर प्रगटे जग में जादो॥१॥ दूध लियो दधि लियो लियो घृत माखन … more →
pushtimarg wrote 1 year ago: सब ग्वाल नाचे गोपी गावे। प्रेम मगन कछु कहत न आवे॥१॥ हमारे राय घर ढोटा जायो। सुनि सब लोग बधाये आयो॥२॥ … more →
pushtimarg wrote 1 year ago: नन्द बधाई दीजे हो ग्वालन। तुमारे स्याम मनोहर आये गोकुल के प्रतिपालन॥१॥ युवतिन बहु विधि भूषन दीजे विप … more →