दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: वह कौनसी संस्कृति और संस्कार है जिसके नष्ट होने का खतरा पैदा हो गया है जिसे बचाने के लिये इतने सारे … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: कभी शब्द नहीं बनता अकेला शब्द कभी भाषा नहीं बनता। कई मिलकर बनाते हैं एक भाव समूह जिससे उनका निज परिच … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: लुटता रहा पूरा शहर मगर लोग देखते रहे। ‘खराब ज़माना आ गया है’ एक दूसरे से बस यही कहते रहे। ‘बचाने के ल … more →
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: बहस होना जरूरी है क्योंकि किसी भी सामाजिक,आर्थिक और धार्मिक विषय पर प्रस्तुत निष्कर्ष अंतिम नहीं होत … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हिंदी की विकास यात्रा का चार खंडों में बांटा जाता है और इसमें हमारे यहां सबसे अधिक भक्ति काल महत्वपू … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हिंदी -अंग्रेजी अनुवाद टूल का मैं कल से उपयोग कर रहा देख रहा हूं तो उसमें सुखद आश्चर्य का अनुभव हो र … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मैं सोचता हूँ कि ब्लोगरों के विषय पर कम लिखूं पर रोज कोई न कोई ऐसी बात होती है कि मुझे अपनी पुरानी ल … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आओ कुछ पल के लिए आत्ममुग्ध हो जाएं चलो अपने ब्लोग पर लिख आयें हमारे लिखने से ज़माना नहीं बदल जायेगा प … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: कुछ ब्लोगों में शब्द और वर्तनी की गलतिया आ जाती हैं. मैं खुद कई गलतियां कर जाता हूँ, यह स्वीकार करते … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: १.किसी भी व्यक्ति का जहाँ सम्मान न हो उसे त्याग देना चाहिए. क्योंकि बिना सम्मान के मनुष्य जीवन जीने … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: वह प्रतिदिन हिट होने के नुस्खे सबको बताएं और शब्दों के डाक्टर कहलाये मरीज पढ़ते नुस्खा जब तक डाक्टर स … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: कोई भी धर्म अपने अनुयायियों के विश्वास के बिना नहीं चल सकता , और उसके मुखिया अपना प्रभुत्व जमाने के … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: शहर में गंदगी के ढेर देखकर अंग्रेज पर्यटक ने स्थानीय गाइड से पूछा -’ हमने सुना है जब हमारी … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: नये लेखक जिन्होंने अभी हाल ही में इंटर नेट पर लिखना शुरू किया है और जो पहले से ही लिख रहे हैं और मेर … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: ऐसा लगता है कि हमने पाश्चात्य सभ्यता को अपनाया पर कुछ लेट हो गये और यही कारण है कि कहीं न तो स्वय … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: धन, पद और प्रतिष्ठा की शक्ति हो जाती है जिन पर मेहरबान क्यों न करे वह उस पर अभिमान इस जहां में सभी य … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: वाह रे बाज़ार तेरा खेल मैदान में पिटे हीरो को कागज और फिल्म पर चमकाकर और सजाकर जनता के बीच देता है ठ … more →