और दाँव अपनी जाँ का किसने लगाया होगा फिर इश्क़ ने फ़रहाद कोई बुलाया होगा यूँ ही नहीं बिगड़ता है कोई किसी बात पे तुमने ज़रूर नमक में छालों को गलाया होगा इक मेरे’ कौन दूसरा दुनिया में तन्हा है तुमसे … more →
तख़लीक़-ए-नज़रKrishna Kumar Mishra wrote 1 month ago: डांडी मार्च "फ़ोटो साभार के० एल० कामत" नमक कानून के साथ टूटा एक मिथक “बिन्नियों वाला … more →
विनय wrote 1 year ago: और दाँव अपनी जाँ का किसने लगाया होगा फिर इश्क़ ने फ़रहाद कोई बुलाया होगा यूँ ही नहीं बिगड़ता है कोई कि … more →
विनय wrote 2 years ago: माज़ी को बहुत खंघालते हैं लोग बेतरह मतलब निकालते हैं लोग हुआ कब मुझ से उनका बुरा किसलिए नाम मेरा उछाल … more →