मोहब्बत नये पर लगाकर उड़ा दी मेरी ख़ाक जुगनू बनाकर उड़ा दी अंधेरे की कालिख तो रहने दो मुझ पर चाँदनी तो तुमने बुझाकर उड़ा दी गुल ख़ार तक चमन ढ़क गया है मेरी ज़िंदगी यूँ जलाकर उड़ा दी यही एक भरम तो बचा था सितमग… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: मोहब्बत नये पर लगाकर उड़ा दी मेरी ख़ाक जुगनू बनाकर उड़ा दी अंधेरे की कालिख तो रहने दो मुझ पर चाँदनी तो … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: हुस्न पर हर पल नये जमाल रहते हैं चेहरे पे हर मिजाज़ के विसाल रहते हैं मिलने की आरज़ू में और मिलने के ब … more →