विनय wrote 1 year ago: मैं आँखों के लिए ख़ाब खरीदने निकला सितारों के लिए चाँद ढूँढ़ने निकला दिन अदा किया तब रात नसीब हुई हर … more →
विनय wrote 1 year ago: तुम मेरी ज़िन्दगी मेरा क़रार हो गया मुझको तुमसे प्यार तू आ जाये अगर मेरे क़रीब तो खुल जायेगा मेरा नसीब … more →
विनय wrote 1 year ago: दूदे-तन्हाई के उस पार क्या है वह ख़ुद है या उसके हुस्न की ज़या है बेवजह किसी की याद यूँ सताती नहीं मे … more →
विनय wrote 1 year ago: वो जिसे इश्क़ कहता था वाइज़1 हम उसमें फँस गये बहाये इतने आँसू कि जहाँ खड़े थे वहीं धँस गये न जिगर से ल … more →