आज तक उन खुशबुओं का सिलसिला तोड़ा नहीं दिल अपना जलाया मगर उसका दिल तोड़ा नहीं तुम भी देके देख लो, ग़म से मै ड़रता नहीं जैसी भी रही ज़िंदगी मुँह कभी मोड़ा नहीं रात कि महफ़िल सजी थी, चाँद का गिलास था ग़म पिये त… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: आज तक उन खुशबुओं का सिलसिला तोड़ा नहीं दिल अपना जलाया मगर उसका दिल तोड़ा नहीं तुम भी देके देख लो, ग़म स … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: मरने की दुआ दे दो हमको जीने का तमाशा और नहीं इस रंज मुसीबत ग़म से भरी दुनिया की तमन्ना और नहीं साहिल … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: देख आऊं वो गिरा खून कहीं मेरा तो नहीं मेरी ही लाश सजी हो कहीं ऐसा तो नहीं टूट ही जाते हैं ख़्वाब, साँ … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: ये ज़ख़्म-ए-जुदाई मेरा भर क्यों नहीं जाता वो शख़्स मेरे दिल से उतर क्यों नहीं जाता कब तक रहूं हैरान परे … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: आज तक समझा नहीं मै क्यों गया तू छोड़कर क्या कमी थी प्यार में रिश्ते गया सब तोड़कर देख तू आ के ज़रा मेरी … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: मेरी ज़िंदगी में सहारा नहीं है किस किस को मैने पुकारा नहीं है निकलता हूँ घर से तो ये सोचता हूँ वो क्य … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: हूँ चल रहा उस राह पर जिसकी कोई मंज़िल नहीं है जुस्तजू उस शख़्स की जो कभी हासिल नहीं वहम जाने ये मेरे इ … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: तुमने मुड़कर भी नहीं देखा मुझे जाते जाते एक तकल्लुफ़ ही सही जिसको निभाते जाते क्या ख़ता थी के टूट गये ह … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: सच शय है वो जिसको कभी बोला नहीं जाता अपनी ही क़ब्र को कभी खोला नहीं जाता क्या रंग सियासत ने दिया है ज … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: वो नहीं क़ातिल ये तो खंजर की ख़ता थी वो कहाँ बदले मेरी नज़र की ख़ता थी उस ही की दीवारें ज़रा मजबूत नहीं थ … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: हर तराशा हुआ बुत ख़ुदा नहीं होता हर आँख में दिल का आईना नहीं होता रही होंगी शायद कोई मजबूरियां उसकी व … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: इश्क़ हर इक का हल नहीं होता मसला हर इक सरल नहीं होता तुझको देखा तो फिर यकीं आया फूल हर इक कँवल नहीं ह … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: कमज़ोर मै नहीं हूँ जंगों का दिल नहीं है देखा नहीं है जाता हारा हुआ ज़माना रखता है लाज देखो गुमराहियों … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: आजकल उनसे तबियत नहीं मिलती अब वो पहले सी राहत नहीं मिलती हम ही हैं जिसको नसीब हिज्र है सब को शब-ए-फ़ु … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: हाथ कुछ आया नहीं बेरुखी के सिवा वो और कुछ नहीं था एक अजनबी के सिवा ना जफ़ाएं ना तक़ाज़े ना बेरुखी ना दग … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: मंज़िलें दिखती नहीं बस छा रहीं हैं दूरियाँ रास्ते मुश्किल किये पास आ रहीं हैं दूरियाँ हर क़दम पर बिछ र … more →