वज़नी साँसों में पिस रहा है दिन सारा मुझे आज भी है इन्तिज़ार तुम्हारा नम है नफ़स-नफ़स मेरे सीने में क्यों खर्च नहीं होती साँस जीने में मेरी बाक़ी ज़िन्दगी का तुम ही सहारा मुझे आज भी है इन्तिज़ार तुम्हारा नाम… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: वज़नी साँसों में पिस रहा है दिन सारा मुझे आज भी है इन्तिज़ार तुम्हारा नम है नफ़स-नफ़स मेरे सीने में क्यो … more →