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Blogs about: नागार्जुन

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घूम रहे हैं राजपथों पर डाकू अंगुलीमाल - नागार्जुन10 comments

रवि कुमार, रावतभाटा wrote 2 months ago: घूम रहे हैं राजपथों पर डाकू अंगुलीमाल – नागार्जुन ( a kavita poster by ravi kumar, rawatbhata) … more →

Tags: कविता-पोस्टर

इन्दु जी क्या हुआ आपको3 comments

Satish Chandra satyarthi wrote 7 months ago: यह कविता बाबा नागार्जुन ने इंदिरा गांधी की हिटलरी नीतियों के विरोध में लिखी थी.  क्या हुआ आपको? क्या … more →

Tags: इन्दु जी क्या हुआ आपक, कविता, नालंदा, बिहार, सतीश चन्द्र सत्यार्, साहित्य, Bihar, JNU, Kavita

आओ, बेटी, आ जाओ, पास बैठो

Satish Chandra satyarthi wrote 7 months ago: विज्ञापन सुंदरी रमा लो मांग में सिन्दूरी छलना… फिर बेटी विज्ञापन लेने निकलना… तुम्हारी च … more →

Tags: विज्ञापन, सतीश चन्द्र सत्यार्, Bihar, JNU, Kavita, Korean, Poem, Sahitya, satish chandra satyarthi

बाकी बच गया अण्डा 6 comments

Satish Chandra satyarthi wrote 7 months ago: पाँच पूत भारतमाता के, दुश्मन था खूंखार गोली खाकर एक मर गया,बाकी रह गये चार चार पूत भारतमाता के, चारो … more →

Tags: hindi, Kavita, Sahitya, satish chandra satyarthi

नागार्जुन और चोर1 comment

Nishant wrote 9 months ago: महान बौद्ध संत नागार्जुन के पास संपत्ति के नाम पर केवल पहनने के वस्त्र थे। उनके प्रति अपार श्रद्धा प … more →

Tags: बौद्ध कथाएँ, संत-महात्मा

अग्निबीज - नागार्जुन2 comments

Satish Chandra satyarthi wrote 9 months ago: अग्निबीज तुमने बोए थे रमे जूझते, युग के बहु आयामी सपनों में, प्रिय खोए थे! अग्निबीज तुमने बोए थे तब … more →

Tags: Poem, कविता, अग्निबीज, Nagarjun

अकाल और उसके बाद1 comment

संपादक- मिथिलेश वामनकर wrote 2 years ago: कई दिनों तक चूल्हा रोया, चक्की रही उदास कई दिनों तक कानी कुतिया सोई उनके पास कई दिनों तक लगी भीत पर … more →

Tags: आधुनिक काल-कविताएं, अकाल और उसके बाद, Nagarjun

गुलाबी चूड़ियाँ

Rewa Smriti wrote 2 years ago: प्राइवेट बस का ड्राइवर है तो क्या हुआ, सात साल की बच्ची का पिता तो है! सामने गियर से उपर हुक से लटका … more →


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