नामंज़ूर थी पेशकश तुम्हें दिल की कैसे दिखाऊँ तुम्हें उल्फ़त दिल की मजरूह तेरे प्यार ने मुझको किया देख क्या हालत हो गयी मेरे दिल की यह ज़ौक़े-दर्द वह नख़्वत तेरी कब छुपी है तुमसे हसरत दिल की यह बेसदा आँखें… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: नामंज़ूर थी पेशकश तुम्हें दिल की कैसे दिखाऊँ तुम्हें उल्फ़त दिल की मजरूह तेरे प्यार ने मुझको किया देख … more →