वह कहाँ चले गये जो कल घर आये थे हमारे थोड़ा-सा और क़रीब हमारे वह कहाँ चले गये जो कल घर आये थे हमारे बड़ी रहमत की थी जो आये किसी बहाने से उनके चेहरे पर थी दबी-सी मुस्कुराहट आँखें कह रही थीं अनकहे अफ़साने… more →
तख़लीक़-ए-नज़रGrey Rainbow - स्याह इंद्रधनुष wrote 1 year ago: सपने ये निगाहों के सच हों न हों, ज़िन्दगी मे हम करीब हों न हों । ऐ दोस्त तुझे रखेंगे सदा इस दिल में, … more →
Grey Rainbow - स्याह इंद्रधनुष wrote 1 year ago: कोई नज़रें मिलाने भी नही देता है, हमारी नज़रों का रुख देख कर मुँह फेर लेता है । शायद यह सोच कर कि, कह … more →
विनय wrote 1 year ago: वह कहाँ चले गये जो कल घर आये थे हमारे थोड़ा-सा और क़रीब हमारे वह कहाँ चले गये जो कल घर आये थे हमारे ब … more →
विनय wrote 1 year ago: धीरे-धीरे प्यार होता है होते-होते इक़रार होता है जब हम भी हैं यहाँ तो जब वह भी हैं यहाँ तो जब हम भी ह … more →