चल पड़ा हूँ फिर उन्ही रास्तों पर, मंजिल का है पता मुझे, रास्ते का भी पता मुझे, पहुच जाऊंगा वक्त पर, है सबको ख़बर, फिर सोचता हूँ, कितना सफर और बाकि है, इस ज़िंदगी का, न जाने क्यों? साथी खोजती है ये निगाह… more →
मेरे दिल ने...रवि कुमार, रावतभाटा wrote 1 week ago: शोला हो चुकी निगाहों के जरिए (a poem by ravi kumar, rawatbhata) मैं नींद खोजता रहा नींद एक ख़्वाब बि … more →
विनय wrote 3 months ago: सहर-ब-सहर1 मैं ढूँढ़ता रहा शुआएँ2 कहाँ छिप गयीं नूर-सी रोशन निगाहें न कोई घर रहा मेरा न कोई ठिकाना म … more →
विनय wrote 1 year ago: न कोई शिकायत है तुझसे न कोई गिला है तुम अपने हसीं लबों से हर्फ़ छुओ न छुओ कम-स-कम बाहम निगाहों में गु … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: चल पड़ा हूँ फिर उन्ही रास्तों पर, मंजिल का है पता मुझे, रास्ते का भी पता मुझे, पहुच जाऊंगा वक्त पर, ह … more →
विनय wrote 1 year ago: बहुत ख़ूबसूरत प्यार का दिन है जिसे चाहो दिल से, उसे पाने का दिन है रंग हैं चारों तरफ़, गुलाबों की ख़ु … more →
विनय wrote 1 year ago: बिन तुम्हारे मैं क्या हूँ तुम न समझोगे आप तन्हाई की सदा हूँ तुम न समझोगे तुम्हारे ग़मे-इश्क़ में जो च … more →
विनय wrote 1 year ago: यह कैसा लम्हा है यह कैसा एहसास है तू पलकों में क़ैद है दिल के पास है क्या देखूँ तेरे सिवा क्या चाहूँ … more →
विनय wrote 1 year ago: ख़ामोश निगाह तेरी क्या बातें करती है आँखों में रहती है व नींदों में बहती है दिल की बात करें क्या एक … more →
विनय wrote 1 year ago: तेरी चुप निगाहें व शर्मायी नज़रें तेरे प्यार का तोहफ़ा हैं, मेरे लिए एक बार तो कुछ कह दे सनम तू एक बार … more →
विनय wrote 1 year ago: जीज़स से पूछेंगे तुमको बनाया कैसे कम्प्यूटर से रचा या बनाया हाथ से कुछ न कुछ बात तो सभी में थी पर हसी … more →
विनय wrote 1 year ago: यह दिल क्यूँ किसी का होना चाहे जाये जाँ, जाये क्यों न जान ही मगर यह दिल किसी का होना चाहे जबसे मेरी … more →
विनय wrote 1 year ago: साहिबा, साहिबा, साहिबा तेरी अदाओं पर मैं फ़िदा साहिबा, साहिबा, साहिबा तू मेरे प्यार की सुबह तुझको ढूँ … more →
विनय wrote 1 year ago: आज वह हर शख़्स मुझे बेग़ाना लगता है कल तक जिसके लिए दिल दिवाना लगता है निगाहों में हैं सारे अंदाज़ आज … more →
विनय wrote 1 year ago: वो क्यों देखती है मुझे? उसे क्या चाहिए मुझसे? न रब्त कोई रखा मैंने उससे न ही उसने मुझसे फिर क्यों दे … more →
विनय wrote 1 year ago: बारिश, बूँदें, पत्ते, मिट्टी -सौंधी रात, चाँद, तारे, निगाह -मेरी मरासिम लफ़्ज़ों से नहीं होते एहसास से … more →