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Blogs about: नित्य पाठ

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निरोधलक्षण

pushtimarg wrote 1 year ago: यच्च दुःखं यशोदाया नन्दादीनां च गोकुले। गोपिकानां तु यद्‌दुःखं स्यान्मम क्वचित्‌॥१॥ गोकुले गोपिकानां … more →

Tags: श्री वल्लभ, षोडश ग्रंथ

सन्यासनिर्णय

pushtimarg wrote 1 year ago: पश्चात्तपनिवृत्यर्थं परित्यागो विचार्यते। स मार्गाद्वितये प्रोक्तो भक्तौ ज्ञाने विशेषतः॥१॥ कर्म मार् … more →

Tags: महाप्रभु श्री वल्लभ, श्री वल्लभ, षोडश ग्रंथ

पच्चपद्यानि1 comment

pushtimarg wrote 1 year ago: श्रीकृष्णरसविक्षिप्तमानसा रतिवर्जिताः। अनिर्वृतालोकवेदे ते मुख्याः श्रवणोत्सुकाः॥१॥ विक्लिन्नमनसो ये … more →

Tags: महाप्रभु श्री वल्लभ, श्री वल्ल्भ, षोडश ग्रंथ

भक्तिवर्द्धिनी

pushtimarg wrote 1 year ago: यथा भक्तिः प्रवृद्धा स्यात्तथोपायो निरूप्यते। बीजभावे दृढ़े तु स्यात्यागाच्छवण कीर्त्तनात्‌॥१॥ बीजदाढ … more →

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अन्तःकरणप्रबोध

pushtimarg wrote 1 year ago: अंतःकरण मद्वाक्यं सावधानतया शृणु। कृष्णात्परं नास्ति दैवं वस्तुतो दोषवर्जितं॥१॥ चाण्डाली चेद्राजपत्न … more →

Tags: श्री वल्ल्भ, षोडश ग्रंथ

विवेकधैर्याश्रय

pushtimarg wrote 1 year ago: विवेकधैर्ये सततं रक्षरणीय तथाश्रयः विवेकस्तु “हरिः” सर्व निजेच्छातः करिष्यति॥१॥ प्रार्थि … more →

Tags: श्री वल्लभ, षोडश ग्रंथ, vivekadhairyashraya

पुष्टिप्रवाहमर्यादा1 comment

pushtimarg wrote 1 year ago: पुष्टिप्रवाह मर्यादा विशेषेण पृथक पृथक। जीव-देह-क्रियाभेदैः प्रवाहेण फलेन च॥१॥ वक्ष्यामि सर्वसन्देहा … more →

Tags: महाप्रभु श्री वल्लभ, षोडश ग्रंथ

सिद्धान्तमुक्तावली1 comment

pushtimarg wrote 1 year ago: नत्वा हरिं प्रवक्ष्यामि स्वसिद्धांत विनिश्चयम। कृष्ण सेवा सदा कार्या मानसी सा परा स्मृता॥१॥ चेतस्तस् … more →

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श्री सर्वोत्तम जी - गुजराती धौल6 comments

pushtimarg wrote 2 years ago: भले प्रकट्या श्री वल्लभदेव, श्री पुरुषोत्तम भूतल फरी जी। नही प्राकृत धर्मनो लेश, अप्राकृत निज वपु धर … more →

Tags: गुजराती

श्री नन्दकुमाराष्टकं

pushtimarg wrote 3 years ago: सुन्दर गोपालं उरवनमालं नयन विशालं दुःख हरं, वृन्दावन चन्द्रं आनंदकंदं परमानन्दं धरणिधरं । वल्लभ घनश् … more →

श्री गिरिराजधार्याष्टकम1 comment

pushtimarg wrote 3 years ago: भक्ताभिलाषा चरितानुसारी दुग्धादिचौर्यण यशोविसारी । कुमारिता नन्दित घोषनारि ममः प्रभु श्री गिरिराजधार … more →

चतुःश्लोकी

pushtimarg wrote 3 years ago: सर्वदा सर्वभावेन भजनीयो व्रजाधिपः । स्वस्यायमेव धर्मो हि नान्यः क्वापि कदाचन ॥१॥ एवं सदा स्वकर्त्तव् … more →

Tags: षोडश ग्रंथ

नवरत्नं

pushtimarg wrote 3 years ago: चिन्ताकापि न कार्या निवेदितात्मभिः कदापीति। भगवानपि पुष्टिस्थो न करिष्यति लौकिकीं च गतिम ॥१॥ निवेदनण … more →

Tags: षोडश ग्रंथ

बालबोध

pushtimarg wrote 3 years ago: नत्वा हरिं सदानन्दं सर्व सिद्धान्त संग्रहम । बालप्रबोधनार्थाय वदामि सुविनिश्चितम ॥१॥ धर्मार्थकाममोक् … more →

Tags: षोडश ग्रंथ

श्री सर्वोत्तम स्तोत्र2 comments

pushtimarg wrote 3 years ago: प्राकृत धर्मानाश्रयम प्राकृत निखिल धर्म रूपमिति । निगम प्रतिपाद्यमं यत्तच्छुद्धं साकृत सतौमि ॥१॥ कलि … more →

मधुराष्टकं 1 comment

pushtimarg wrote 3 years ago: अधरं मधुरं वदनं मधुरं, नयनं मधुरं हसितं मधुरं। हृदयं मधुरं गमनं मधुरं, मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥१॥ वच … more →

Tags: षोडश ग्रंथ

कृष्णाश्रय

pushtimarg wrote 3 years ago: सर्वमार्गेषु नष्टेषु कलौ च खल धर्मिणि । पाष्ण्डप्रचुरेलोके कृष्ण एव गतिर्मम ॥१॥ म्लेच्छाक्रान्तेषुदे … more →

Tags: षोडश ग्रंथ

यमुनाष्टक2 comments

pushtimarg wrote 3 years ago: नमामि यमुनामहं सकल सिद्धि हेतुं मुदा मुरारि पद पंकज स्फ़ुरदमन्द रेणुत्कटाम । तटस्थ नव कानन प्रकटमोद प … more →

Tags: षोडश ग्रंथ

प्रातः स्मरण एवं मंगलाचरण3 comments

pushtimarg wrote 3 years ago: श्री गोवर्धन नाथ पाद युगलम हे यंगवीन प्रियं । नित्यं श्री मधुराधिपं सुखकरं श्री विट्ठलेशं मुदा ॥ श्र … more →


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