मेरी प्रिय मेरी प्रियतमा मेरी प्रेयसी मैं तुमको सच्चे मन से प्रेम करता हूँ निर्मल निश्छल सच्चा प्रेम करता हूँ सो जाते हैं सारे मात्र मैं ही जागता हूँ उठके रात्रि में तेरा नाम पुकारता हूँ टूटे कोई तारा… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: मेरी प्रिय मेरी प्रियतमा मेरी प्रेयसी मैं तुमको सच्चे मन से प्रेम करता हूँ निर्मल निश्छल सच्चा प्रेम … more →