जैसे-तैसे निभाते हैं प्यार करके पछताते हैं सच्चे-झूठे सपने तेरे रातों की नीं… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 7 months ago: जैसे-तैसे निभाते हैं प्यार करके पछतात … more →
विनय wrote 7 months ago: ख़ामोश निगाह तेरी क्या बातें करती है आ … more →
विनय wrote 7 months ago: एक ख़ुशबू जाने कहाँ से आयी है कुछ दिनो … more →