जैसे-तैसे निभाते हैं प्यार करके पछताते हैं सच्चे-झूठे सपने तेरे रातों की नींदें उड़ाते हैं दो किनारे जिससे मिलते हैं वह पुल टूट गया बारिश बाढ़ बनी कि फिर हाथों से हाथ छूट गया उम्मीदें क्यों रखते हैं ज… more →
तख़लीक़-ए-नज़रaspundir wrote 2 months ago: नींद में भय एवं खराब स्वप्न निवारण यंत्र यदि किसी बच्चे या बड़े व्यक्ति को नींद में डर लगता हो या बे … more →
विनय wrote 1 year ago: जैसे-तैसे निभाते हैं प्यार करके पछताते हैं सच्चे-झूठे सपने तेरे रातों की नींदें उड़ाते हैं दो किनारे … more →
विनय wrote 1 year ago: ख़ामोश निगाह तेरी क्या बातें करती है आँखों में रहती है व नींदों में बहती है दिल की बात करें क्या एक … more →
विनय wrote 1 year ago: एक ख़ुशबू जाने कहाँ से आयी है कुछ दिनों से दिल पर छायी है शायद, शायद ऐसा तब लगता है जब प्यार किसी से … more →