Lost your password?

Blogs about: नीति

Featured Blog

क्षमादान सदैव उचित नहीं - महाकाव्य महाभारत में युधिष्ठिर के प्रति द्रौपदी की सलाह

योगेन्द्र जोशी wrote 3 weeks ago: महाकाव्य महाभारत के वन पर्व में पांडवों के बारह-वर्षीय वनवास के समय उनके द्वारा भोगे गये कष्टों का व … more →

Tags: प्राचीन-भारत, महाभारत, संस्कृत-साहित्य, Mahabharata, Morals, क्षमादान, द्रौपदी, पांडव, युधिष्ठिर

कठोपनिषद् के नीति वचन - श्रेयस् (कल्याणप्रद) एवं प्रेयस् (चित्ताकर्षक) में चुनाव

योगेन्द्र जोशी wrote 1 month ago: कठोपनिषद् में ऋषिकुमार बालक नचिकेता और यम देवता के बीच प्रश्नोत्तरों की कथा का वर्णन है । नचिकेता की … more →

Tags: अध्यात्म, उपनिषद्, दर्शन, संस्कृत-साहित्य, Philosophy, UPANISHADA, आध्यात्मिक हित, कठोपनिषद्, नचिकेता

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् और राजधर्म - प्रजासुखे सुखं राज्ञः ...

योगेन्द्र जोशी wrote 2 months ago: आचार्य चाणक्य के नाम से प्रायः हर भारतवासी परिचित होगा । उन्हें अवसर के अनुरूप हर प्रकार की नीति अपन … more →

Tags: प्राचीन-भारत, राजनीति, शासन, संस्कृत-साहित्य, Government, कौटिलीय अर्थशास्त्र, कौटिल्य, चाणक्य, राजधर्म

‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः’ इत्यादि - मनुस्मृति के वचन2 comments

योगेन्द्र जोशी wrote 2 months ago: ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते …’ कहते हुए समाज में स्त्रियों को सम्मान मिलना चाहिए की बात अक्सर सु … more →

Tags: प्राचीन-भारत, संस्कृत-साहित्य, सूक्ति, Morals, मनुस्मृति, यत्र नार्यस्तु पूज्, हिंदू समाज, Hindu society, manusmriti

‘सत्यं वद, धर्मं चर, ...’ - तैत्तिरीय उपनिषद् के उपदेशात्मक मंत्र

योगेन्द्र जोशी wrote 3 months ago: अपने आरंभिक छात्रजीवन के समय संस्कृत पाठ्यपुस्तकों में मैंने “सत्यं वद । धर्मं चर ।… मातृदेवो … more →

Tags: उपनिषद्, दर्शन, वेद, Morals, UPANISHADA, ved, Anuvak, अनुवाक, तैत्तिरीय उपनिषद्

बुद्धवचनामृत, अश्वघोषविरचित बुद्धचरितम् से - ऐहिक संबंधों का अस्थायित्व 1 comment

योगेन्द्र जोशी wrote 3 months ago: प्राचीन संस्कृत साहित्य में ‘बुद्धचरितम्’ नामक एक काव्य उपलब्ध है । मेरे पास इसकी एक प्रति है, श्री … more →

Tags: अध्यात्म, दर्शन, संस्कृत-साहित्य, Philosophy, Ashvaghosh, अश्वघोष, जन्म-मृत्यु चक्र, जीवधारी, बुद्धचरितम्

महाभारत प्रकरण: यक्ष-युधिष्ठिर संवाद - महाजनो येन गतः सः पन्थाः1 comment

योगेन्द्र जोशी wrote 4 months ago: महाकाव्य महाभारत में ‘यक्ष-युधिष्ठिर संवाद’ नाम से एक पर्याप्त चर्चित प्रकरण है । संक्षेप में उसका व … more →

Tags: अध्यात्म, दर्शन, लोकव्यवहार, महाभारत, Philosophy, Morals, Mahabharata, पांडव, जीवधारी

छिद्रेष्वनर्था बहुलीभवन्ति - संस्कृत नाट्यकृति मृच्छकटिकम् की उक्ति

योगेन्द्र जोशी wrote 5 months ago: अक्सर यह देखने को मिलता है कि जब मनुष्य किसी एक विपत्ति का सामना कर रहा होता है तो और भी कई अड़चनें उ … more →

Tags: संस्कृत-साहित्य, सूक्ति, नाटक, मृच्छकटिक, Morals, छिद्रेष्वनर्था बहुल, मृच्छकटिकम्, Mruchchhakatikam, संस्कृत नाट्यकृति

लोभः पापस्य कारणम् (हितोपदेश) - लोभ से प्रेरित होती है ठगी

योगेन्द्र जोशी wrote 5 months ago: इधर कुछ दिनों से टीवी समाचार चैनलों पर ठगी के मामलों की चर्चा सुनने को मिल रही हैं । बताया जा रहा है … more →

Tags: दर्शन, संस्कृत-साहित्य, सूक्ति, हितोपदेश, Morals, महाभारत, लोभ, तृष्णा, Mahabharata

विदुर नीति-दुष्ट को अपना राज बताना खतरनाक

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: धर्माऽऽख्याने श्मशाने च रोगिणां या मतिर्भवेत्। सा सर्वदैव तिष्ठेयेत् को न मुच्येत बंधानात्।। हिंदी म … more →

Tags: अध्यात्म, दीपक भारतदीप, साहित्य, हिन्दी, Deepak bharatdeep, India, inlglish, Internet, jagran

तृष्णा से मुक्ति भोग से नहीं शमन से संभव - नीतिवचन महाभारत से1 comment

योगेन्द्र जोशी wrote 6 months ago: महाकाव्य महाभारत में राजा ययाति की कथा का उल्लेख है । कहा जाता है कि किसी समय दैत्यों के गुरु शुक्रा … more →

Tags: लोकव्यवहार, संस्कृत-साहित्य, महाभारत, अनुशासन पर्व, तृष्णा, आदि पर्व, पुरु, Mahabharata, ययाति

नीति वचन: गच्छन् पिपिलिको याति ...

योगेन्द्र जोशी wrote 6 months ago: माध्यमिक स्तर की किसी कक्षा में संस्कृत विषयक पुस्तक में मैंने कभी नीति संबंधी एक श्लोक पढ़ा था । वह … more →

Tags: लोकव्यवहार, संस्कृत-साहित्य, नीति वचन, गरुड़, चींटी, संकल्प, commitment

दूसरों की सफलता सहना सरल नहीं - चाणक्य वचन

योगेन्द्र जोशी wrote 7 months ago: इस माह की ‘सम्भाषणसंदेशः’ नामक मासिक संस्कृत पत्रिका में मुझे अधोलिखित नीतिवचन पढ़ने को मिला: दह्यमान … more →

Tags: लोकव्यवहार, संस्कृत-साहित्य, सूक्ति, प्रतिस्पर्धा, चाणक्य, निंदा, राजनेता, सम्भाषणसंदेशः, स्वभाव

हितोपदेश के नीतिवचन: दो, विद्या की महत्ता

योगेन्द्र जोशी wrote 8 months ago: पिछली पोस्ट (९ मार्च २००९) में मैंने संस्कृत ग्रंथ हितोपदेश के नीतिवचनों की चर्चा आरंभ की थी । उस पो … more →

Tags: लोकव्यवहार, संस्कृत-साहित्य, सूक्ति, विद्या, ज्ञान, धन, धर्म, योग्यता

हितोपदेश के नीतिवचन: एक, विद्या की महत्ता

योगेन्द्र जोशी wrote 8 months ago: नीतिवचनों से सुसंपन्न साहित्य संस्कृत भाषा में प्रचुरता से उपलब्ध है । रामायण, महाभारत तथा विभिन्न प … more →

Tags: संस्कृत-साहित्य, पञ्चतन्त्र, सूक्ति, हितोपदेश, नीतिवचन, नारायण पंडित, विद्या, विष्णुशर्मा

पशु-पक्षियों की बोली: शिक्षाप्रद एक कथा

योगेन्द्र जोशी wrote 9 months ago: मैंने बहुत पहले कभी शिक्षाप्रद एक लघुकथा पढ़ी थी । अब उस कथा का अक्षरशः उल्लेख नहीं कर सकता, किंतु उस … more →

Tags: कहानी, मानव व्यवहार, लघुकथा, गृहस्थ, पशु-पक्षी, बोली, महात्मा

कभी न बुढ़ाने वाली तृष्णा - नीतिवचन महाभारत से

योगेन्द्र जोशी wrote 9 months ago: महाकाव्य महाभारत के कौरव-पांडव युद्ध की समाप्ति के बाद उसके दुष्परिणामों से व्यथित युधिष्ठिर शरशय्या … more →

Tags: लोकव्यवहार, सूक्ति, महाभारत, भीष्म, युधिष्ठिर, अनुशासन पर्व, तृष्णा, माया, वृद्धावस्था

और वो चली गई5 comments

प्रेमलता पांडे wrote 9 months ago: जीजान से उसने मदद की। बिल्कुल न सोचा रिश्ता-नाता और न सोचा अपना सम्मान। बस कोल्हू के बैल की भांति सभ … more →

Tags: कहानी/कथा, निबौरी

‘लोकः आचरति अहितम् ’ - भर्तृहरिकृत वैराग्यशतकम् से

योगेन्द्र जोशी wrote 10 months ago: राजा भर्तृहरि ने बतौर कवि के शतकत्रयम् की रचना की थी, जिसके तीन खंड हैं: नीतिशतकम्, शृंगारशतकम् एवं … more →

Tags: लोकव्यवहार, संस्कृत-साहित्य, सूक्ति, नीतिशतक, भर्तृहरि, संसार, लोक, वैराग्यशतक, सत्कर्म


Have your say. Start a blog.

See our free features →

Related Tags
All →

Follow this tag via RSS