तुमको नफ़रत है मुझसे मुझको क़रार है तुमसे तन्हा मिलो मुझसे कभी’ कहूँ प्यार है तुमसे तुम चलते हो मुझसे मुँह फेर के जाने किस बात पे हालत मेरी नीयत दिल की असरार1 है तुमसे ज़माने भर के काम आज निपटाने ह… more →
तख़लीक़-ए-नज़रदीपक भारतदीप wrote 11 months ago: हम अक्सर अपने संस्कार और संस्कृति के संपन्न होने की बात करते हैं। कई बार आधुनिकता से अपने संस्कार और … more →
विनय wrote 2 years ago: तुमको नफ़रत है मुझसे मुझको क़रार है तुमसे तन्हा मिलो मुझसे कभी’ कहूँ प्यार है तुमसे तुम चलते हो … more →