आ तेरी आँखों के नीलम से यह चाँद-रात नीली कर दूँ पलकों पे रख लूँ कुछ ख़ाब तेरे अपने कर लूँ… खोने लगें तो खोने देना डूब जाना मुझको डबोना बोझल-बोझल शाम है मत पूछना क्या नाम है आ तेरी आँखों के नीलम … more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: आ तेरी आँखों के नीलम से यह चाँद-रात नीली कर दूँ पलकों पे रख लूँ कुछ ख़ाब तेरे अपने कर लूँ… खोन … more →