रचना: फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ स्वर: मेंहदी हसन / बेग़म अख़्तर / नूरजहाँ दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के वो जा रहा है कोई शब-ए-ग़म गुज़ार के वीराँ है मैकदा ख़ुम-ओ-साग़र उदास है तुम क्या गये के रूठ गये दिन बहार के इक… more →
निंदा पुराणअंकुर वर्मा wrote 1 year ago: रचना: फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ स्वर: मेंहदी हसन / बेग़म अख़्तर / नूरजहाँ दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के वो जा … more →
अंकुर वर्मा wrote 1 year ago: रचना: मिर्ज़ा असदल्लाह ख़ाँ ‘ग़ालिब’ मुद्दत हुई है यार को मेहमाँ किये हुए जोश-ए-क़दह से बज़्म … more →
अंकुर वर्मा wrote 1 year ago: रचना: फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ स्वर: नूरजहाँ मुझ से पहली सी मोहब्बत मेरे महबूब न माँग मैं ने समझा था कि तू है तो … more →
अंकुर वर्मा wrote 1 year ago: रचना: पंजाबी लोकगीत स्वर: मुसर्रत नाज़िर / नूरजहाँ आभारोक्ति : पंजाबी भाषा के मेरे अतिसीमित ज्ञान के … more →
अंकुर वर्मा wrote 1 year ago: शायर: क़मर जलाबादी स्वर: ग़ुलाम अली/ नूरजहाँ कभी कहा न किसी से तेरे फ़साने को न जाने कैसे ख़बर हो गई जमा … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: ग़ज़ल, कविता का एक प्रकार है जिसकी शुरुआत दसवीं शताब्दी में फ़ारसी कविता में हुई थी और बारहवीं शताब् … more →