विनय wrote 1 year ago: कोई आया है जाने के बाद क़ब्र पर वह गया है दो गुल मुझे नज़्र कर कोई तूफ़ाँ उठा था जो मिट गया है दे गया ह … more →
विनय wrote 1 year ago: मुझे तुमसे मिलके मुकम्मिल होने का वक़्त है एक सूखा हुआ दरया हूँ जिसको घटा की प्यास है –x– … more →