बस एक बार मिली थी नज़र, देखो अब आया होश हमें कुछ और जी लेते खवाबों में, यूँ बेसबब आया होश हमें हाल-ए-दिल हमें भी कहना था, वो गये तब आया होश हमें दिन गुज़रा उसकी यादों में, जो हुई शब आया होश हमें लगा संव… more →
इक शायर अंजाना सा...विनय wrote 4 months ago: तेरी तीरे-नज़र किस अदा से यार उठती है रह-रहकर रुक-रुककर बार-बार उठती है हम बीमारि-ए-इश्क़ के मारे हुए … more →
विनय wrote 4 months ago: मेरी मोहब्बत को समझते हो तुम ग़लत, ग़लत नहीं है तुमको चाहा है मैंने अगर इसमें कुछ ग़लत नहीं है दिखा … more →
विनय wrote 5 months ago: उसने हमसे कभी वफ़ा न की और हमने भी तमन्ना न की बहुत बोलते हैं सब ने कहा सो आदत-ए-कमनुमा न की बहुत आये … more →
विनय wrote 5 months ago: झोंके हवा के उसका रूख़सार चूमते हैं फूल उसकी आँखों को देख यार झूमते हैं तेरे हुस्नो-शबाब के बारे क्य … more →
विनय wrote 7 months ago: एक ख़ामोश अफ़साना जो तुम्हारी नज़रों ने सुनाया है मुझे काश! वह तुम अपने लबों से मेरे लबों पर लिखती कभी … more →
विनय wrote 7 months ago: पूनम थी शाम जिसने देखा मुझे मैंने उसकी नज़र को उसने मुझे, और चाँद रातभर रश्क करता रहा! शायिर: विनय प् … more →
विनय wrote 7 months ago: हिक़ारत भरी नज़रों से जिसे देखा है दुनिया ने उसको तुम एक नज़र मोहब्बत से देख लेना, वह मुफ़लिस है मगर जीन … more →
विनय wrote 9 months ago: यह जिस्म नहीं है, काँच के टुकड़े हैं ज़मीने-वक़्त पर दूर तक बिखरे हैं इन्हें मत छूना हाथों में चुभ जाय … more →
विनय wrote 11 months ago: ख़ुशबू बिछायी है राहों में तुम चले आओ, तुम चले आओ दिल बेक़रार है बहुत तुम चले आओ, तुम चले आओ मौसम बड़ … more →
विनय wrote 1 year ago: मेरी हर नज़र बेक़रार’ और रूह बेताब है, लबों को भी न तस्लीम एक बूँद आब है रोज़-रोज़ की मुश्किली, यह … more →
विनय wrote 1 year ago: एक दोस्त मेरा भी हो एक यार मेरा भी हो जिसकी बाँहों में मुझे मिल जाये ज़िन्दगी जो झूठ-मूठ रूठ के सताये … more →
विनय wrote 1 year ago: हम में जीतने का हौसला है ‘नज़र’ यह बाज़ी भी हम मारकर जायेंगे यह ज़ख़्म जाविदाँ नहीं रहने वा … more →
विनय wrote 1 year ago: ज़ख़्मे-जिगर भर आये, कहाँ हो तुम? बदरा सावन बुलाये, कहाँ हो तुम? अपने हश्र तक पहुँचा ‘नज़र … more →
विनय wrote 1 year ago: उम्मीद जागी है इक बार फिर तुम्हें पाने की बचाये ख़ुदा! नज़र न लग जाये ज़माने की तेरी जुस्त-जू को न मिट … more →
विनय wrote 1 year ago: इस जानिब य उस जानिब कौन ‘नज़र’ है कौन ‘ग़ालिब’ एक बला है दर्दे-निहाँ कौन बुरा … more →
विनय wrote 1 year ago: ज़ोर से दिल धड़कता है (हाँ धड़कता है) तूफ़ान साँसों में चलता है (हाँ चलता है) आँखें ठहर जाती हैं तस्वी … more →
विनय wrote 1 year ago: कभी वैसे होता है, कभी ऐसे होता है यह प्यार जो होता है, प्यार ही रहता है… तुमको सब पता है हमक … more →
विनय wrote 1 year ago: यह प्यार चीज़ क्या है? दीवानों का है काम बेकार ही पीछे दौड़ते हैं बिन सोचे अन्जाम कहते थे कि प्यार हम … more →
विनय wrote 1 year ago: मैंने तेरा नाम नहीं जाना जाना तो जाना बस इतना जाना प्यार में तेरे मैं हो गया दीवाना पहली नज़र में होश … more →