हम शाम लगभग पाँच बजे जानकीचट्टी पहुँच गए। अति शीतल हवा और बर्फ के नन्हे कणों के समान फुहारों ने हमें स्वागत में दाँत किटकिटाने का अवसर प्रदान किया। हमने गर्म कपड़े तो पहन नहीं रखे थे। बंद गाड़ी में क्या… more →
पसंदप्रेमलता पांडे wrote 1 year ago: हम शाम लगभग पाँच बजे जानकीचट्टी पहुँच गए। अति शीतल हवा और बर्फ के नन्हे कणों के समान फुहारों ने हमें … more →
विनय wrote 1 year ago: चाँद गवाह है मेरे प्यार का क्या यही ख़्याल है, मेरे यार का कुछ न ख़बर हुई उस पल की कुछ न पता चला उस … more →