कोई आया है जाने के बाद क़ब्र पर वह गया है दो गुल मुझे नज़्र कर कोई तूफ़ाँ उठा था जो मिट गया है दे गया है समन्दर जो लुट रहा है लहरें काट देती हैं कभी साहिल को साहिल लहरों के साथ बह रहा है कोई आया है जाने … more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: कोई आया है जाने के बाद क़ब्र पर वह गया है दो गुल मुझे नज़्र कर कोई तूफ़ाँ उठा था जो मिट गया है दे गया ह … more →