चंचल आंखों की पीड़ा से छलक रहा क्यों जाम आंखों से आंसू बहते हैं मधुशाला के नाम कैसे बच पायेगा पंखी ठगी हुई सी आंखें छाया विष हलाहल नभ में उड़ती दोनो पांखें गले तीर के लग जाने के कैसे ये अरमान चीर कल… more →
हरिहर झाHarihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: चंचल आंखों की पीड़ा से छलक रहा क्यों जाम आंखों से आंसू बहते हैं मधुशाला के नाम कैसे बच पायेगा पंख … more →