कुतर दिए है, पंख अपने, जिनसे उँची उड़ान भारी थी, नील गगन मे, स्वच्छन्द उड़ चली थी, तोड़ दिए है, सब सपने, जिनमे सौ रंग भरे थे, सपने सजाकर, पंखों को पाकर, दूर बहुत-दूर हो गयी थी, अपनो से, न दुख की पुकार… more →
NidhiKM...Dil Se...Life is not fair...You never know...Hai na...Tum jo bhi ho,sirf tumhare karana ho...wrote 6 months ago: कुतर दिए है, पंख अपने, जिनसे उँची उड़ान भारी थी, नील गगन मे, स्वच्छन्द उड़ चली थी, तोड़ दिए है, सब स … more →
wrote 1 year ago: जादू जैसा छाया पहला-पहला नशा जी में आये पंख खोल उड़ जाऊँ मैं आस्माँ से आगे निकल जाऊँ मैं मस्ती दिल प … more →