अमृता प्रीतम का उपन्यास ’पिंजर’ मैंने तब पढ़ा था पहली बार जब में स्कूल में ही था। उसके बाद जाने कितनी ही बार पढ़ लिया। आज जब हम आजादी की सालगिरह मना रहे हैं तो मन कहता है कि इस उपन्यास के बारे में कुछ… more →
आईनाprithvi wrote 4 days ago: घुळगांठ जो है! कोई गांठ जब गडमड होकर उलझ जाती है उसे घुळगांठ कहते हैं. यानी अनखुल ग्रंथि. मूल रूप से … more →
जगदीश भाटिया wrote 1 year ago: क्या आप पंजाबी, गुजराती, उर्दू, तेलुगू, उड़िया, तमिल, मलयालम या कन्नड़ समझते हैं पर पढ़ नहीं सकते?क्या … more →
जगदीश भाटिया wrote 1 year ago: अमृता प्रीतम का उपन्यास ’पिंजर’ मैंने तब पढ़ा था पहली बार जब में स्कूल में ही था। उसके बाद जाने कित … more →
जगदीश भाटिया wrote 1 year ago: शिव कुमार बटलवी के बारे में मैंने पहले भी लिखा था और उनके कुछ गीत प्रस्तुत किये थे। आज उनके जन्मदिन … more →
जगदीश भाटिया wrote 1 year ago: आ देख मेरी पेशानी को तक़दीर के हरफे लिक्खे हैं पैरों के निशाँ जब देखे जहाँ सौ बार झुकाया सर को वहाँ … more →
जगदीश भाटिया wrote 2 years ago: आज बैसाखी के अवसर पर अमृता प्रीतम की एक रचना और उसका हिंदी अनुवाद। 1947 पर लिखी गयी यह रचना वारिस शा … more →
जगदीश भाटिया wrote 2 years ago: एक मुलाकात मैं चुप शान्त और अडोल खड़ी थी सिर्फ पास बहते समुन्द्र में तूफान था……फिर समुन्द … more →
जगदीश भाटिया wrote 2 years ago: एक घटना तेरी यादें बहुत दिन बीते जलावतन हुईं जीतीं हैं या मर गयीं- कुछ पता नहीं सिर्फ एक बार एक घटन … more →
जगदीश भाटिया wrote 2 years ago: बिरह का सुलतान – शिव कुमार बटालवी (ਸ਼ਿਵ ਕੁਮਾਰ ਬਟਾਲਵੀ)शिव कुमार बटालवी पंजाबी के ऐसे आधुनिक कवि … more →