एक ही सफर में थक कर रुका हूं पूरे तेंतीस पडावों पर…..। उतावलेपन में कहीं भी ठहर कर नहीं देखा कि कहां क्या है…..। बस यूं ही कहीं कहीं का याद है कुछ कुछ….। शायद वह पांचवा पडाव था… more →
आंसू ही है जो जीने की ललक देते हैंsushilgirdher wrote 1 year ago: एक ही सफर में थक कर रुका हूं पूरे तेंतीस पडावों पर…..। उतावलेपन में कहीं भी ठहर कर नहीं देखा क … more →