Blogs about: पत्ते
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खिली-खिली महकी बहारें हैं
खिली-खिली महकी बहारें हैं झीलों पर बहते शिकारें हैं ठण्डी-ठण्डी सौंधी हवाएँ … more »
तख़लीक़-ए-नज़र
खिली-खिली महकी बहारें हैं
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विनय प्रजापति wrote 5 days ago: खिली-खिली महकी बहारें हैं झीलों पर बहत … more »
तुम्हारी ख़ुशबू से महक उठा है मन
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: तुम्हारी ख़ुशबू से महक उठा है मन तुम्ह … more »
शबनम यूँ सुलगी रात सोते पत्तों पर
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: शबनम यूँ सुलगी रात सोते पत्तों पर जैसे … more »
तन्हाई यूँ ढूँढ़ती है मुझे
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: तन्हाई यूँ ढूँढ़ती है मुझे जैसे मेरी स … more »
ख़िज़ाँ मुस्कुराने लगी
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: ख़िज़ाँ मुस्कुराने लगी सूखे पत्ते उड़ … more »
जब पतझड़ के मौसम आते हैं
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: तुझे देखा तू ही मेरी हमनशीं तुझे चाहा … more »
गुज़रे जो मौसम हैं वह भी आयेंगे
विनय प्रजापति wrote 3 months ago: गुज़रे जो मौसम हैं वह भी आयेंगे तेरे ना … more »
नज़्म का कोई सिरा मिले...
विनय प्रजापति wrote 8 months ago: टूटा हुआ चाँद है मटमैली-सी रात में बुझ … more »
मरासिम लफ़्ज़ों से नहीं होते
विनय प्रजापति wrote 8 months ago: बारिश, बूँदें, पत्ते, मिट्टी -सौंधी रात, … more »
बारिश जैसी हो तुम
विनय प्रजापति wrote 8 months ago: खिली हुई शाम की बिखरी हुई धूप में बारि … more »
