Blogs about: पत्थर

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इंसान 7 comments

kmuskan wrote 10 months ago: कभी कभी ये सोचती हूँ कि क्या आंतकवादी इंसान नही होते अगर होते है तो क्यों उनकी आत्मा उन्हें धिक्कार … more →

Tags: Kavita, muskan, Zindagi, hindi, Poetry, kala, Blogroll, दिल, इंसान

सोचता है आदमी6 comments

pryas wrote 10 months ago: फूल पत्थर से उगेगा सोचता है आदमी, पर्वतों पिघलोगे इकदिन, सोचता है आदमी. चाँद पर तो घुमने हम कई बार आ … more →

Tags: मेरी रचना, pryas, yah bhi khoob rahi, सागर, naresh blog, फूल, पर्वतों, सोचता है आदमी, परवाने

मेरा माहताब...

विनय wrote 1 year ago: मेरा माहताब जिसे देखा दिल हुआ बेताब मेरा मेरा मेरा मेरा माहताब जिसे देखा दिल हुआ बेताब जिसे देखा दिल … more →

Tags: मेरा गीत, Adore, इश्क़, ख़ाब, ख़ाहिशें, दिक़्क़तें, प्यार, बेताब, माहताब

दिल के ख़ाब दिल में ही सुलगते हैं

विनय wrote 1 year ago: दिल के ख़ाब दिल में ही सुलगते हैं हक़ीक़त के निशाँ अभी दूर लगते हैं हल्की-हल्की आवाज़ें कानों में गुनगु … more →

Tags: मेरा गीत, इश्क़, कुरान, ख़ाब, गुच्छे, गुल, चमन, प्यार, फासला

हम भी पागल थे ग़ैरों को अपना जानते थे

विनय wrote 1 year ago: हम भी पागल थे ग़ैरों को अपना जानते थे रुसवा किये जायेंगे इस क़दर यह न जानते थे बेवफ़ा गर वह होता दर्द श … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, इश्क़, Love, Blame, Frozen, प्यार, मोहब्बत, Friendship, वफ़ा

लहर इक ‘विनय’

विनय wrote 1 year ago: लहर इक ‘विनय’ टकराया जो पत्थर से टूट गया जब भी निकला आगे उसके हाथों से एक हाथ छूट गया जब भी बैठता है … more →

Tags: मेरी नज़्म, Alone, अजनबी, अफ़सोस, ख़ता, खा़स, दिल, दोस्त, नाचीज़

सब चेहरे एक-से हो जाते हैं...

विनय wrote 1 year ago: यह कौन-सा मुक़ाम है? जहाँ आकर सब चेहरे एक-से हो जाते हैं दिल रेत बनकर सीने में गहरा और गहरा धँसने लगत … more →

Tags: मेरी नज़्म, Age, आवाज़, उम्र, गहरा, गुमशुदा, चेहरे, दिल, धड़कन


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