हम हिंदुस्तानियों का अंग्रेजी-मोह अद्वितीय और तारीफे-काबिल है । आम पढ़े-लिखे हिंदुस्तानी की दिली चाहत रहती है वह इतनी अंगरेजी सीख ले कि उसमें बिला रुकावट गिटिर-पिटिर कर सके और दूसरों को प्रभावित कर सके… more →
हिन्दी तथा कुछ और भीअफ़लातून wrote 1 day ago: १९३६ में गुजरात साहित्य परिषद के समक्ष परिषद के पत्रकारिता प्रभाग की रपट महादेव देसाई ने प्रस्तुत की … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: भारत में इंटरनेट प्रयोक्ताओं की संख्या सात करोड़ से ऊपर है-इसका सही अनुमान कोई नहीं दे रहा। कई लोग इस … more →
योगेन्द्र जोशी wrote 4 months ago: हम हिंदुस्तानियों का अंग्रेजी-मोह अद्वितीय और तारीफे-काबिल है । आम पढ़े-लिखे हिंदुस्तानी की दिली चाहत … more →
अफ़लातून wrote 8 months ago: Technorati tags: Technorati tags: अखबार, पत्रकार, अभिव्यक्ति, संचार, किशन पटनायक, kishan patanayak, … more →
योगेन्द्र जोशी wrote 11 months ago: विगत पोस्ट (२ जनवरी, २००९) के आगे । इस ब्लॉग पर प्रस्तुत मेरे लेख-शृंखला का उद्येश्य रहा है उन कुछ श … more →
योगेन्द्र जोशी wrote 11 months ago: विगत पोस्ट (२२ दिसंबर, २००८) के आगे । भ्रष्टाचार - भ्रष्टाचार भी उन तमाम शब्दों में से एक है जिसे हम … more →
योगेन्द्र जोशी wrote 12 months ago: विगत पोस्ट (११ दिसंबर, २००८) के आगे । धर्मनिरपेक्षता – राजनीति के क्षेत्र में यह शब्द बहुधा सु … more →
योगेन्द्र जोशी wrote 1 year ago: मैं दैनिक समाचारपत्र ‘हिन्दुस्तान’ (लखनऊ संस्करण) का नियमित पाठक हूं । इस समाचारपत्र के साथ सप्ताह म … more →
योगेन्द्र जोशी wrote 1 year ago: (पिछले लेख से आगे) मैंने पिछली बार अपना मत व्यक्त किया था कि अनुवाद में भावों को महत्त्व दिया जाना च … more →
योगेन्द्र जोशी wrote 1 year ago: (पिछले लेख से आगे) मैंने इस बात की चर्चा की थी कि एनडीटीवी के प्रियदर्शनजी ने तीन शब्दों (वस्तुतः पद … more →
योगेन्द्र जोशी wrote 1 year ago: कल के दैनिक समाचार-पत्र ‘हिन्दुस्तान’ में एनडीटीवी टीवी चैनल से संबद्ध प्रियदर्शनजी का लिखा एक आलेख … more →
amitabhtri wrote 1 year ago: राष्ट्रीय स्वाभिमान आन्दोलन के राष्ट्रीय संयोजक श्री के.एन.गोविन्दाचार्य की पहल पर नई दिल्ली स्थित क … more →
अफ़लातून wrote 2 years ago: साहित्य की परिभाषा और परिधि में आने लायक पत्रकारीय लेखन को हासिल करने के लिए हमें क्या करना होगा ? च … more →
सृजन शिल्पी wrote 3 years ago: तमाम विरोध प्रदर्शनों और मीडिया द्वारा उसे लगभग एकतरफा एवं पक्षपातपूर्ण ढंग से तूल दिए जाने के बावजू … more →
सृजन शिल्पी wrote 3 years ago: गाँवों के देश भारत में, जहाँ लगभग 80% आबादी ग्रामीण इलाक़ों में रहती है, देश की बहुसंख्यक आम जनता को … more →
सृजन शिल्पी wrote 3 years ago: हंस, जून, 2006 अर्जुनों का विद्रोह The Hindu, 18 June, 2006 The return of discrimination Frontline, … more →