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Blogs about: पधभाव तरंग

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मुस्कुराती गज़ल।3 comments

"रज़िया" wrote 1 year ago: झुमती गाती और गुनगुनाती गज़ल,गीत कोइ सुहाने सुनाती गज़ल। ज़िंदगी से हमें है मिलाती गज़ल, उसके अशआर में ए … more →

Tags: पद्यभाव तरंग

रिश्तों का मोल1 comment

"रज़िया" wrote 1 year ago:        क्यों देर हुई साजन तेरे यहाँ आने में? क्या क्या न सहा हमने अपने को मनानेमें। तुने तो हमें ज़ाल … more →

Tags: Uncategorized

माया4 comments

"रज़िया" wrote 1 year ago:            क्यों दौड रहा है किसी परछाइ के पीछे? आगे तो ज़रा देख वो छाया तो नहीं है?              इतना … more →

ज़िंदगी5 comments

"रज़िया" wrote 1 year ago:   ज़िंदगी     ज़िंदगी तूने बसाया अपनी ये आग़ोश में। ज़िंदगी तूने समाया अपनी ये आग़ोश में।   मरसिये ग़म के … more →

याद है1 comment

"रज़िया" wrote 1 year ago:            वक़्त ने साथ छोड़ा हमारा जो था, हाय तेरा, तड़पना मुझे याद है। मुंह छिपाकर तेरा मेरी आगोश म … more →

मक़डी का जाल4 comments

"रज़िया" wrote 1 year ago:                                    हिंमत हारा बैठा था में, पीठ फिराये भविष्य से।   हार चुका था अपनी … more →

पैग़ाम6 comments

"रज़िया" wrote 1 year ago:                                      देख़ो लोगों मेरे जाने का है पैग़ाम आया..(2) ख़ुदा के घर से है ये  … more →

यादें8 comments

"रज़िया" wrote 1 year ago: यादें पीछे मुड के हमने जब देख़ा ,गुज़रा वो ज़माना याद आया। बीती एक कहानी याद आइ, बीता एक फ़साना याद आया। … more →

तलाश7 comments

"रज़िया" wrote 1 year ago:                 तलाश सफर में ख़ो गई मंज़िल,उसे तलाश करो।.  किनारे छूटा है साहिल, उसे तलाश करो।.   था अ … more →

Tags: Uncategorized

बरख़ा 4 comments

"रज़िया" wrote 1 year ago:                      देख़ो आई रुत मस्तानी..(2) आसमान से बरसा पानी.. देख़ो आई रुत मस्तानी..(2) पत्ते पे … more →

सवाल

"रज़िया" wrote 1 year ago:                                         सवाल मन में उठ्ठा एक सवाल, आसमॉ गर होता लाल। मछलियॉ आकाश में … more →

बंधन1 comment

"रज़िया" wrote 1 year ago:     बंधन   ये बंधन टूटेना ।(2) चाहे कोई बाधा आये, चाहे आये तूफ़ॉ । ये बंधन टूटेना ।(2) साथ कभी छूटेना … more →

तू लेजा ना लेजा मुझे 1 comment

"रज़िया" wrote 1 year ago: मैं तो आऊंगी तेरी गली। चाहे कोइ कहे पग़ली। तू लेजा ना लेजा मुझे(2)मैं तो आऊंगी… वादीओं में बसेर … more →

જરૂર છે4 comments

"रज़िया" wrote 1 year ago: કૂબેર નો ખજાનો હું ક્યાં માંગું છું? મુજને તો ફ્ક્ત થોડી કૃપા ની જરૂર છે. નથી જરૂર રાજપાટ કે મહેલો ન … more →

આ તે કેવી જીત?

"रज़िया" wrote 1 year ago:     આ તે કેવી જીત? થંભી ગયેલું ગીત ! થીજી ગયેલું સ્મિત !….આ તે કેવી જીત?   હજારો ની ભીડ માં પણ … more →


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