सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी, बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी, गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी, दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी। चमक उठी सन सत्तावन में, वह तलवार पु… more →
पूणॅतया हिन्दी ब्लाग (hindi everything)ssjha wrote 3 years ago: लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती. नन्हीं चींटी जब दाना लेकर … more →
ssjha wrote 3 years ago: सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी, बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी, गुमी हुई आज़ादी की … more →