नन्द बधाई दीजे हो ग्वालन। तुमारे स्याम मनोहर आये गोकुल के प्रतिपालन॥१॥ युवतिन बहु विधि भूषन दीजे विप्रन को गौदान। गोकुल मंगल महा महोत्सव कमल नैन घनस्याम॥२॥ नाचत देव विमल गंधर्व मुनि गावे गीत रसाल। परम… more →
पुष्टिमार्गpushtimarg wrote 1 year ago: नन्द बधाई दीजे हो ग्वालन। तुमारे स्याम मनोहर आये गोकुल के प्रतिपालन॥१॥ युवतिन बहु विधि भूषन दीजे विप … more →
pushtimarg wrote 1 year ago: चैत्र मास संवत्सर परिवा बरस प्रवेस भयो है आज। कुंज महल बैठे पिय प्यारी लालन पहरे नौतन साज॥२॥ आपुही क … more →
pushtimarg wrote 1 year ago: लाल कछु कीजे भोजन तिल तिल कारी हों वारी हों। अब जाय बैठो दोउ भैया नंदबाबा की थारी हो॥१॥ कहियत हे आज … more →
pushtimarg wrote 1 year ago: पतंग की गुडी उडावन लागे व्रजबाल॥ सुंदर पताका बांधे मनमोहन बाजत मोरन के ताल॥१॥ कोउ पकरत कोउ खेंचत कोउ … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: प्रथम गोचारण चले कन्हाई। माथे मुकुट पीतांबर की छबी वनमाला पहराइ ॥१॥ कुंडल श्रवण कपोल बिराजत, सुंदरता … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: कापर ढोटा नयन नचावत कोहे तिहारे बाबा की चेरी। गोरस बेचन जात मधुपुरी आये अचानक वनमें घेरी॥१॥ सेननदे स … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: आज दधि कंचन मोल भई। जा दधि को ब्रह्मादिक इच्छत सो गोपन बांटि दई॥१॥ दधि के पलटे दुलरी दीनी जसुमति खबर … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: रंचक चाखन देरी दह्यो। अद्भुत स्वाद श्रवन सुनि मोपे नाहित परत रह्यो॥१॥ ज्यों ज्यों कर अंबुज उर ढांकत … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: यह धन धर्म ही तें पायो। नीके राखि जसोदा मैया नारायण ब्रज आयो॥१॥ जा धन को मुनि जप तप खोजत वेदहुं पार … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: पद्म धर्यो जन ताप निवारण। चक्र सुदर्शन धर्यो कमल कर भक्तन की रक्षा के कारण॥१॥ शंख धर्यो रिपु उदर विद … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: आज बधाई को दिन नीको। नंद घरनी जसुमति जायो है, लाल भामतो जीको॥१॥ पंच शब्द बाजे बाजत घर घर ते आयो टीको … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: रक्षा बंधन को दिन आयो। गर्गादि सब देव बुलाये लालहिं तिलक बनायो॥१॥ सब गुरुजन मिल देत असीस चिरंजीयो ब् … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: राखी बांधत जसोदा मैया । बहु सिंगार सजे आभूषण गिरिधर भैया॥१॥ रतन खचित राखी बांधि कर, पुन पुन लेत बलैय … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: वृंदावन क्यों न भये हम मोर। करत निवास गोवर्धन ऊपर, निरखत नंदकिशोर॥१॥ क्यों न भये बंसी कुल सजनी, अधर … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: जागो मेरे लाल जगत उजियारे । कोटिक मनमथ वारों मुसकनि पर कमल नयन अंखियन के तारे ॥१॥ संगले ग्वालबाल बछ … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: गोपी प्रेम की ध्वजा । निज गोपाल किते अपने वश उरधर श्याम भुजा ॥१॥ शुक मुनि व्यास प्रशंसा कीनी ऊधो संत … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: तिहारे चरन कमल को माहत्म्य शिव जाने के गौतम नारी । जटाजुट मध्य पावनी गंगा अजहु लिये फिरत त्रिपुरारी … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: डोल माई झूलत हैं ब्रजनाथ । संग शिभित वृषभान नंदिनी ललिता विशाखा साथ ॥१॥ वाजत ताल मृदंग झांझ डफ रुंज … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: श्री यमुने सुखकारनी प्राण प्रतिके । जिन्हे भूलि जात पिय सुधि करि देत, कहाँ लों कहिये इनके जु हित के … more →