रचना: परवीन शाक़िर स्वर: बल्क़ीस ख़ानुम गोरी करत सिंगार बाल बाल मोती चमकाये रोम रोम महकाये गोरी करत सिंगार मांग सिंदूर की सुन्दरता से चमके चंदन हार जूड़े में जूही की बेली बाँह में हार सिंगार गोरी करत सिंग… more →
निंदा पुराणअंकुर वर्मा wrote 1 year ago: रचना: परवीन शाक़िर स्वर: बल्क़ीस ख़ानुम गोरी करत सिंगार बाल बाल मोती चमकाये रोम रोम महकाये गोरी करत सिं … more →
अंकुर वर्मा wrote 1 year ago: रचना : परवीन शाकिर पा-ब-गिल सब हैं रिहाई की करे तदबीर कौन दस्त-बस्ता शहर में खोले मेरी ज़ंजीर कौन (प … more →
अंकुर वर्मा wrote 1 year ago: रचना: परवीन शाकिर स्वर: मेंहदी हसन राग: दरबारी कू-ब-कू फैल गयी बात शनासाई की उसने ख़ुशबू की तरह मेरी … more →