हिन्दी,हिन्दू और हिंदुत्व शब्दों में जो आकर्षण है उसका कारण कोई उनकी कानों को सुनाई देने वाली ध्वनि नहीं बल्कि वह भाव जो उनके साथ जुड़ा है। यह भाव हिन्दी भाषा के अध्यात्मिक, हिन्दू व्यक्ति के ज्ञानी,और… more →
****दीपकबापू कहिन**** ****Deepak Bharatdeep's hindi patrika****Krishna Kumar Mishra wrote 2 weeks ago: सरकार की अर्थनीति, व्यापारनीति, और राजनीति इन तीनों चीज़ों से मैं कोई राफ़्ता नही रखता और न ही मुझे … more →
K M Mishra wrote 4 months ago: देश के 141 जिले सूखे की चपेट में हैं । लोगों को आवश्यक सामानों की मूल्य वृद्धि के लिये तैयार रहना चा … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: अध्यात्म नितांत एक निजी विषय है पर जब उसकी चौराहे पर चर्चा होने लगे तो समझ लो कि कहीं न कहीं उसकी आड़ … more →
K M Mishra wrote 5 months ago: =>सखी, इस भीषण गर्मी में चार कोस दूर तालाब से मटकी में पानी भर कर लाते-लाते मेरे पैरों में छाले प … more →
prithvi wrote 6 months ago: बूढ़ी नानी की कहानी थार की बालुई रेत में गुलाबी या चटक लाल रंग का एक छोटा सा जीव मानसून की पहली बारि … more →
प्रेमलता पांडे wrote 8 months ago: धरती से है दिन और रात, फिर कैसी यह बात? झेंप मिटाने की साजिश , या बाज़ार की है ख़ारिश? … more →
प्रेमलता पांडे wrote 9 months ago: नीर की बूंद, तारे शुष्क टेंटुआ, प्राण-आधार। जल ही जीवन है बार-बार कहने पर भी हम नहीं सुधरते। तुर्रा … more →
प्रेमलता पांडे wrote 9 months ago: आजकल जब भी बाज़ार जाते हैं और कुछ ऐसा सामान खरीदते हैं जैसे- सब्जी, फल या अन्य वह सब चीज़ें जो छोटी थै … more →
प्रेमलता पांडे wrote 9 months ago: विकल्प हमें ही चुनना है। प्रकृति तो सदा ही सामंजस्य और समन्वय बैठाती रही है, पर हम अपनी घटिया हरकतों … more →
K M Mishra wrote 10 months ago: -बुरा न मानो होली है, हिक्क ! पड़ोसी के आंगन में खड़ा दशहरी खड़े-खड़ … more →
K M Mishra wrote 10 months ago: सवेरे के साढे छ: बज रहे हैं और मैं मुँह में टूथब्रश घुमाता लॉन में खड़ा हॅंू । सड़क पर बुङ्ढेजन, जनी अ … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 10 months ago: केवल उंगलियां देख कर घबराती ग्वालिन देख रही अपनी ’मौसी’ का चेहरा - आग-बबूला पहाड़ से लुढ़कते पत्त्थर स … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हिन्दी,हिन्दू और हिंदुत्व शब्दों में जो आकर्षण है उसका कारण कोई उनकी कानों को सुनाई देने वाली ध्वनि … more →
प्रेमलता पांडे wrote 1 year ago: घर से दो दिन के लिए ही क्यों न जाओ डर ही रहता है कब कौन कब्ज़ा करले! समय ही ऐसा है। सब को अपनी-अपनी प … more →
उन्मुक्त wrote 1 year ago: हैमलेट (Hamlet) में, विलियम शेक्सपीयर (William Shakespeare) ने लिखा, ‘Not a whit, we defy augu … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: बहुत समय से देश के विकास होने के प्रचार का मैं टीवी चैनलों और अख़बारों में सुनता आ रहा हूँ. तमाम तरह … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: पहले इस नई दुनिया में पर्यावरण प्रदूषण फैलना शुरू हुआ या आतंकवाद? यह प्रश्न ऐसा ही है कि पहले मुर्गी … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: मुख से सिगरेट का धुँआ चहुँ और फैलाते हुए करते हैं शहर में फैले पर्यावरण प्रदूषण की शिकायत शराब के कई … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: अगर एक अखबार की खबर पर यकीन करें तो आगे चलकर प्रकृति को निहारने के लिए भी पैसे देने पड़ेंगे. इस मामले … more →