Blogs about: पर्यावरण

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बरसात के साथ धार्मिक चालाकी-हिंदी व्यंग्य (hindi vyangya)

दीपक भारतदीप wrote 3 days ago: अध्यात्म नितांत एक निजी विषय है पर जब उसकी चौराहे पर चर्चा होने लगे तो समझ लो कि कहीं न कहीं उसकी आ … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, मस्तराम, व्यंग्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging

उत्तर भारत में सूखे की आशंका (व्यंग्य, कार्टून)1 comment

K M Mishra wrote 1 week ago: =>सखी, इस भीषण गर्मी में चार कोस दूर तालाब से मटकी में पानी भर कर लाते-लाते मेरे पैरों में छा … more →

Tags: आर्थिक, बाजार, भारत, मीडिया, मौसम, राष्ट्रीय, सूखा, हिन्दी हास्य व्यंग्, Cartoon

थार की बूढी नानी 2 comments

prithvi wrote 1 month ago: बूढ़ी नानी की कहानी थार की बालुई रेत में गुलाबी या चटक लाल रंग का एक छोटा सा जीव मानसून की पहल … more →

Tags: गांव- गुवाड़, थार, बूढी नानी, रेगिस्‍तान, लाल गाय

तन-मन धन से करें जो सेवा6 comments

प्रेमलता पांडे wrote 2 months ago:                 धरती से है दिन और रात, फिर कैसी यह बात? झेंप मिटाने की साजिश , या बाज़ार की है ख़ारिश … more →

Tags: भावांजलि, धरती-दिवस

प्राण-आधार1 comment

प्रेमलता पांडे wrote 3 months ago: नीर की बूंद, तारे शुष्क टेंटुआ, प्राण-आधार। जल ही जीवन है बार-बार कहने पर भी हम नहीं सुधरते। तुर्रा … more →

Tags: फोटोशॉप और मैं, नीर की बूंद

बहुत कुछ लुटा के होश में आए तो सही!3 comments

प्रेमलता पांडे wrote 3 months ago: आजकल जब भी बाज़ार जाते हैं और कुछ ऐसा सामान खरीदते हैं जैसे- सब्जी, फल या अन्य वह सब चीज़ें जो छोटी थ … more →

Tags: लेख/आलेख, चित्राकंन, थैले/झोला

आपकी मर्ज़ी?1 comment

प्रेमलता पांडे wrote 3 months ago: विकल्प हमें ही चुनना है। प्रकृति तो सदा ही सामंजस्य और समन्वय बैठाती रही है, पर हम अपनी घटिया हरकतों … more →

Tags: विरासत, फोटोशॉप और मैं, मर्ज़ी, नुकसान, कुल्हाड़ी, पालन-पोषण

दारू सुलभ, आलू सस्ती । खींचो पापड़ संग विस्की । (हास्य/व्यंग्य: होली)

K M Mishra wrote 4 months ago:   -बुरा न मानो होली है, हिक्क !                                   पड़ोसी के आंगन में खड़ा दशहरी ख … more →

Tags: कुरीतियों, त्यौहार, पर्व, बाजार, भ्रष्टाचार, मीडिया, राजनैतिक विसंगतियों, राष्ट्रीय, सामाजिक

मेरी गली के जानवर

K M Mishra wrote 4 months ago: सवेरे के साढे छ: बज रहे हैं और मैं मुँह में टूथब्रश घुमाता लॉन में खड़ा हॅंू । सड़क पर बुङ्ढेजन, … more →

Tags: अन्तर्राष्ट्रीय घटन, आतंकवाद, आर्थिक, कुरीतियों, खेल, त्यौहार, पर्व, प्रदूषण, फिल्म

हिन्दी, हिन्दू और हिंदुत्व:नए सन्दर्भों में चर्चा (१)

दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: हिन्दी,हिन्दू और हिंदुत्व शब्दों में जो आकर्षण है उसका कारण कोई उनकी कानों को सुनाई देने वाली ध्वन … more →

Tags: हिन्दी, समाज, dharm, धर्म, hindi, प्रचार, hindu, ज्ञान, अध्यात्म

कौन कब्ज़ा कर ले!2 comments

प्रेमलता पांडे wrote 9 months ago: घर से दो दिन के लिए ही क्यों न जाओ डर ही रहता है कब कौन कब्ज़ा करले! समय ही ऐसा है। सब को अपनी-अपनी प … more →

Tags: लेख/आलेख, कबूतर

गौरैया को कैसे बचायें?2 comments

उन्मुक्त wrote 1 year ago: हैमलेट (Hamlet) में, विलियम शेक्सपीयर (William Shakespeare) ने लिखा, ‘Not a whit, we defy augu … more →

Tags: हिन्दी, Environmentalism

विकास यानि वाहनों की चौडाई बढना सड़क की कम होना 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बहुत समय से देश के विकास होने के प्रचार का मैं टीवी चैनलों और अख़बारों में सुनता आ रहा हूँ. तमाम त … more →

Tags: Blogroll, Hindi hasya, hindi journlism, hindi web, hindi epatrika, web duniya, web dunia, hindi nai duinia, hindi megzine

पहले आतंकवाद आया कि पर्यावरण प्रदूषण 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पहले इस नई दुनिया में पर्यावरण प्रदूषण फैलना शुरू हुआ या आतंकवाद? यह प्रश्न ऐसा ही है कि पहले मुर् … more →

Tags: sampadkeeya, Global Dashboard, inglish, अभिव्यक्ति, संपादकीय, bharat, चिन्तन, साहित्य, Education

सिगरेट का धुआं छोड़ते हुए 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मुख से सिगरेट का धुँआ चहुँ और फैलाते हुए करते हैं शहर में फैले पर्यावरण प्रदूषण की शिकायत शराब के कई … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, कविता, व्यंग्य, शायरी, शेर, साहित्य, हास्य

जब फूलों को देखने के लिए पैसे देने होंगे

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अगर एक अखबार की खबर पर यकीन करें तो आगे चलकर प्रकृति को निहारने के लिए भी पैसे देने पड़ेंगे. … more →

Tags: Blogroll, writing, Dashboard, aastha, संपादकीय, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, बिंब-प्रतिबिंब, हास्य व्यंग्य

हरी शादी (green wedding)

jagadees wrote 1 year ago: पारिस्थिति के अनुकूल जीवन शैली आज्कल् बहुतचर्चा का विषय बन् जाता है. क्यौम नही शादी? ऊपर का चित्र च … more →

Tags: साइकिल, शादी, जीवन शैली

इस तरह सफेद हाथी का शासन आया

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago:       जंगल के राजा शेर को  उसके खुफिया  प्रमुख सियार  भाया ने दी खबर ‘महाराज आपके  खिलाफ  पूरे … more →

Tags: अभिव्यक्ति, आदमी, कविता, क्षणिका, ताल-बेताल, दृश्य, पहचान, प्रतिबिंब, व्यंग्य

इंसान इसलिये देवता बनने से घबडाते हैं

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: नागपंचमी का दिन  नागमंदिर पर लगामेला श्रद्धालुओं  का आता-जाता हुआ रेला  थोड़ी दूर बैठा सपैरों  का झु … more →

Tags: Blogroll, hindi, Kavita, Thought, inglish, कविता, व्यंग्य चिंतन, शेर-ओ-शायरी, शायरी


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