हिन्दी,हिन्दू और हिंदुत्व शब्दों में जो आकर्षण है उसका कारण कोई उनकी कानों को सुनाई देने वाली ध्वनि नहीं बल्कि वह भाव जो उनके साथ जुड़ा है। यह भाव हिन्दी भाषा के अध्यात्मिक, हिन्दू व्यक्ति के ज्ञ… more →
****दीपकबापू कहिन**** ****Deepak Bharatdeep's hindi patrika****दीपक भारतदीप wrote 3 days ago: अध्यात्म नितांत एक निजी विषय है पर जब उसकी चौराहे पर चर्चा होने लगे तो समझ लो कि कहीं न कहीं उसकी आ … more →
K M Mishra wrote 1 week ago: =>सखी, इस भीषण गर्मी में चार कोस दूर तालाब से मटकी में पानी भर कर लाते-लाते मेरे पैरों में छा … more →
prithvi wrote 1 month ago: बूढ़ी नानी की कहानी थार की बालुई रेत में गुलाबी या चटक लाल रंग का एक छोटा सा जीव मानसून की पहल … more →
प्रेमलता पांडे wrote 2 months ago: धरती से है दिन और रात, फिर कैसी यह बात? झेंप मिटाने की साजिश , या बाज़ार की है ख़ारिश … more →
प्रेमलता पांडे wrote 3 months ago: नीर की बूंद, तारे शुष्क टेंटुआ, प्राण-आधार। जल ही जीवन है बार-बार कहने पर भी हम नहीं सुधरते। तुर्रा … more →
प्रेमलता पांडे wrote 3 months ago: आजकल जब भी बाज़ार जाते हैं और कुछ ऐसा सामान खरीदते हैं जैसे- सब्जी, फल या अन्य वह सब चीज़ें जो छोटी थ … more →
प्रेमलता पांडे wrote 3 months ago: विकल्प हमें ही चुनना है। प्रकृति तो सदा ही सामंजस्य और समन्वय बैठाती रही है, पर हम अपनी घटिया हरकतों … more →
K M Mishra wrote 4 months ago: -बुरा न मानो होली है, हिक्क ! पड़ोसी के आंगन में खड़ा दशहरी ख … more →
K M Mishra wrote 4 months ago: सवेरे के साढे छ: बज रहे हैं और मैं मुँह में टूथब्रश घुमाता लॉन में खड़ा हॅंू । सड़क पर बुङ्ढेजन, … more →
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: हिन्दी,हिन्दू और हिंदुत्व शब्दों में जो आकर्षण है उसका कारण कोई उनकी कानों को सुनाई देने वाली ध्वन … more →
प्रेमलता पांडे wrote 9 months ago: घर से दो दिन के लिए ही क्यों न जाओ डर ही रहता है कब कौन कब्ज़ा करले! समय ही ऐसा है। सब को अपनी-अपनी प … more →
उन्मुक्त wrote 1 year ago: हैमलेट (Hamlet) में, विलियम शेक्सपीयर (William Shakespeare) ने लिखा, ‘Not a whit, we defy augu … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बहुत समय से देश के विकास होने के प्रचार का मैं टीवी चैनलों और अख़बारों में सुनता आ रहा हूँ. तमाम त … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पहले इस नई दुनिया में पर्यावरण प्रदूषण फैलना शुरू हुआ या आतंकवाद? यह प्रश्न ऐसा ही है कि पहले मुर् … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मुख से सिगरेट का धुँआ चहुँ और फैलाते हुए करते हैं शहर में फैले पर्यावरण प्रदूषण की शिकायत शराब के कई … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अगर एक अखबार की खबर पर यकीन करें तो आगे चलकर प्रकृति को निहारने के लिए भी पैसे देने पड़ेंगे. … more →
jagadees wrote 1 year ago: पारिस्थिति के अनुकूल जीवन शैली आज्कल् बहुतचर्चा का विषय बन् जाता है. क्यौम नही शादी? ऊपर का चित्र च … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जंगल के राजा शेर को उसके खुफिया प्रमुख सियार भाया ने दी खबर ‘महाराज आपके खिलाफ पूरे … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: नागपंचमी का दिन नागमंदिर पर लगामेला श्रद्धालुओं का आता-जाता हुआ रेला थोड़ी दूर बैठा सपैरों का झु … more →