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दास्तां लिख रहा हूँ पानी पर5 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: हार जाने की कामरानी पर                दास्तां लिख रहा हूँ पानी पर आपने दिल मेरा जो तोड़ा है शुक्र करत … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Nov 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

Open Source Software Education in India

oskanpur wrote 1 year ago: भारत मे सार्वजनिक वित्त पर चलने वाली शिक्षण सँसथाएं व खुला सोर्स कोड / लाइनक्स उबुँटू शिक्षा – … more →

Tags: , शिक्षा, भारत, खुला, सोर्स, कोड, मे, सार्वजनिक, लाइनक्स

दुख के चेहरे पर लकीरें याद की5 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: दुख के चेहरे पर लकीरें याद की सुन रहा हूं सदा दिलेबरबाद की तेरी महफ़िल तेरा परचम ओ’ हुजूम अब कि … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Feb 2008, की, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

हूँ चल रहा उस राह पर जिसकी कोई मंज़िल नहीं

Rohit Jain wrote 1 year ago: हूँ चल रहा उस राह पर जिसकी कोई मंज़िल नहीं है जुस्तजू उस शख़्स की जो कभी हासिल नहीं वहम जाने ये मेरे इ … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, NOV 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

मुस्कुराने पर भी कर्ज़ है

Rohit Jain wrote 1 year ago: मुस्कुराने पर भी कर्ज़ है दिल को ये कैसा मर्ज़ है अश्क़ों से कहो मुँह ना फेरें इनका भी कुछ फ़र्ज़ है ये ज … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Sep 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

ज़िन्दगी के मोड़ पर आके है ठहरी तिशनगी

Rohit Jain wrote 1 year ago: ज़िन्दगी के मोड़ पर आके है ठहरी तिशनगी साँस टुकड़ा अश्क़ धज्जी और गहरी तिशनगी तन्हाइयां भी साथ हैं साथ ह … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Jun 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

मोहब्बत नये पर लगाकर उड़ा दी

Rohit Jain wrote 1 year ago: मोहब्बत नये पर लगाकर उड़ा दी मेरी ख़ाक जुगनू बनाकर उड़ा दी अंधेरे की कालिख तो रहने दो मुझ पर चाँदनी तो … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Mar 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

हुस्न पर हर पल नये जमाल रहते हैं

Rohit Jain wrote 1 year ago: हुस्न पर हर पल नये जमाल रहते हैं चेहरे पे हर मिजाज़ के विसाल रहते हैं मिलने की आरज़ू में और मिलने के ब … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Mar 2007, पल, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

कह कह कर तुझ पर ग़ज़ल मै मीर हो गया

Rohit Jain wrote 1 year ago: कह कह कर तुझ पर ग़ज़ल मै मीर हो गया मसला दिल का ऐसा उलझा कश्मीर हो गया वो आये मेरे करीब तो यारों यूँ ल … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, JAN 2007, हो, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit


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